जैन साधु-संतों की सुरक्षा को लेकर जशपुर में उठी बड़ी आवाज, विहार मार्गों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल, पुलिस समन्वय और विशेष संरक्षण व्यवस्था की मांग तेज
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जैन साधु-संतों की सुरक्षा को लेकर जशपुर में उठी बड़ी आवाज, विहार मार्गों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल, पुलिस समन्वय और विशेष संरक्षण व्यवस्था की मांग तेज

जशपुरनगर। श्री खण्डेलवाल दिगम्बर जैन समाज, जशपुरनगर ने मध्यप्रदेश के रीवा जिले में जैन साध्वी संघ के साथ हुई दुखद दुर्घटना को लेकर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन के माध्यम से राज्य एवं केंद्र सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाई हैं। समाज ने इस घटना की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने तथा विहाररत जैन साधु-संतों की सुरक्षा के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की है।

समाज की ओर से जिला कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि 20 मई 2026 को रीवा कलेक्ट्रेट भवन के सामने राष्ट्र संत आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की शिष्याओं आर्यिका श्री 105 श्रद्धामति माताजी एवं आर्यिका श्री 105 उपशममति माताजी के साथ हुई दुर्घटना ने पूरे जैन समाज को आहत किया है। समाज ने कहा कि यह केवल सामान्य सड़क दुर्घटना नहीं मानी जा सकती, बल्कि उपलब्ध तथ्यों एवं वीडियो क्लिपों के आधार पर मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है।

ज्ञापन में कहा गया कि जैन साधु-संत पूर्णतः अहिंसक, निःशस्त्र एवं पैदल विहार करने वाले तपस्वी होते हैं, जो किसी प्रकार की सुरक्षा या आधुनिक सुविधाओं का उपयोग नहीं करते। ऐसे में उनके साथ लगातार बढ़ती दुर्घटनाएं और हमले समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।जैन समाज ने प्रमुख रूप से घटना की SIT अथवा न्यायिक जांच, संबंधित CCTV फुटेज एवं डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने, दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई तथा यदि किसी षड्यंत्र के तथ्य सामने आएं तो कठोर धाराएं लगाने की मांग की है।

इसके साथ ही “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करने की मांग करते हुए समाज ने विहार मार्गों पर प्रशासनिक समन्वय, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस सहयोग, ट्रैफिक नियंत्रण, चेतावनी संकेतक एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही है।समाज ने केंद्र सरकार से “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” बनाए जाने की भी मांग की है, जिसमें पैदल विहार करने वाले संतों के लिए राष्ट्रीय गाइडलाइन, सुरक्षा SOP तथा संवेदनशील मार्गों हेतु विशेष प्रावधान शामिल हों।

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि संत आत्मरक्षा के साधनों का उपयोग नहीं करते और पूर्णतः अहिंसक जीवन जीते हैं, इसलिए उनके विरुद्ध होने वाले अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखा जाना चाहिए। स्थानीय स्तर पर “Sant Security Coordination Cell” तथा आपातकालीन संपर्क व्यवस्था बनाने की मांग भी की गई है।

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