हर घर नल-जल योजना” में बड़ा खेल ? पाँच साल से अधूरी पड़ी पानी टंकी, अधिकारी-ठेकेदार की लापरवाही से बूंद-बूंद पानी को तरस रहे भीतघरा के ग्रामीण -गत वर्ष सुशासन शिविर में आवेदन देने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
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हर घर नल-जल योजना” में बड़ा खेल ? पाँच साल से अधूरी पड़ी पानी टंकी, अधिकारी-ठेकेदार की लापरवाही से बूंद-बूंद पानी को तरस रहे भीतघरा के ग्रामीण -गत वर्ष सुशासन शिविर में आवेदन देने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

नारायणपुर 11 मई 2026 :  बगीचा विकासखंड के ग्राम पंचायत भीतघरा की मुख्य बस्ती में शासन की महत्वाकांक्षी “हर घर नल-जल योजना” अब ग्रामीणों के लिए सुविधा नहीं बल्कि विभागीय लापरवाही और भ्रष्ट कार्यप्रणाली का प्रतीक बन चुकी है। गाँव में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के नाम पर लाखों रुपये खर्च कर निर्माण कार्य शुरू तो किया गया, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी योजना अधूरी पड़ी हुई है। स्थिति यह है कि ग्रामीण आज भी पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए परेशान हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदार पूरे मामले से बेखबर बने हुए हैं।

गाँव में बने अधूरे निर्माण स्थल को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह बिना योजना पूर्ण किए कार्य को बीच में छोड़ दिया गया। मौके पर केवल सीमेंट का प्लेटफॉर्म, अधूरी संरचना और पाइप नजर आते हैं, लेकिन पानी की सुविधा आज तक शुरू नहीं हो सकी। पंचयात के उप सरपंच शिवनारायण यादव के अनुसार लगभग पाँच वर्ष पहले निर्माण कार्य शुरू हुआ था, लेकिन कुछ दिनों बाद अचानक काम बंद कर दिया गया। इसके बाद न ठेकेदार वापस लौटा और न ही विभागीय अधिकारियों ने कार्य पूरा कराने में रुचि दिखाई।

उप सरपंच ने बताया कि योजना के नाम पर सरकारी राशि खर्च कर केवल खानापूर्ति की गई। यदि समय पर अधिकारियों द्वारा निगरानी की जाती और ठेकेदार पर दबाव बनाया जाता, तो आज गाँव के लोगों को पेयजल संकट का सामना नहीं करना पड़ता। गर्मी के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है। लोगों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है, जबकि सरकार हर घर तक नल से पानी पहुँचाने के बड़े-बड़े दावे करती है।

 उप सरपंच शिवनारायण ने बताया कि इस समस्या को लेकर ग्रामीणों ने पिछले वर्ष आयोजित “सुशासन तिहार” शिविर में भी शिकायत दर्ज कराई थी। आवेदन में अधूरे निर्माण कार्य को जल्द पूरा कराने की मांग की गई थी। उस समय पीएचई विभाग बगीचा के अधिकारियों ने शीघ्र कार्रवाई और कार्य पूर्ण कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई बदलाव दिखाई नहीं दिया। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।

ग्रामीणों का कहना है कि सुशासन शिविर में जनता अपनी समस्याएँ लेकर पहुँचती है, आवेदन जमा करती है, लेकिन उसके बाद न कोई जांच होती है और न समाधान। लोगों का आरोप है कि अधिकारी केवल आश्वासन देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। यही कारण है कि गाँव में अधूरे निर्माण कार्य अब विभागीय उदासीनता की पहचान बन चुके हैं।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। निर्माण कार्य अधूरा छोड़ने वाले ठेकेदार और निगरानी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो। साथ ही योजना को जल्द पूरा कर गाँव में नियमित पेयजल आपूर्ति शुरू की जाए ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि शासन की योजनाएँ इसी तरह अधूरी छोड़ दी जाएंगी और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होगी, तो विकास के दावे केवल पोस्टर और भाषणों तक सीमित रह जाएंगे। भीतघरा के लोग अब आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर काम और पानी की सुविधा चाहते हैं।

  मुझे आपके माध्यम से भितघरा में नल जल अधूरा होने की जानकारी मिली है ,मैं पूरी जानकारी प्राप्त कर कार्य क्यों अधूरा  है इसका पता कर  जल्द ही काम चालू करवाता हु।। 

एस बी सिंह -ई ई पीएचई  -जशपुर

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