डेढ़ किलोमीटर दूर से पानी ढोने को मजबूर महिलाएं : एक बोरिंग के भरोसे जूझता पूरा गांव, पाइपलाइन बनी शोपीस और ‘हर घर जल’ का सपना अब भी अधूरा
जशपुरनगर 6 मई 2026। जशपुर जिले के पत्थलगांव विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मिर्जापुर के आश्रित ग्राम मक्कापुर में इन दिनों जल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। गांव के हालात ऐसे हैं कि यहां रहने वाले दर्जनों परिवारों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए 1 से डेढ़ किलोमीटर दूर तक पानी लाने जाना पड़ रहा है। भीषण गर्मी के साथ समस्या और गहराती जा रही है, लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी ग्रामीणों पर भारी पड़ रही है।
गांव में पानी का एकमात्र सहारा एक पुराना बोरिंग है, जो पूरे गांव की जरूरतों के सामने बेहद छोटा साबित हो रहा है। यही वजह है कि ग्रामीणों को मजबूरी में कुएं और ढोढ़ी का पानी पीना पड़ रहा है, जो न सिर्फ असुविधाजनक है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है। गांव में साफ पानी की किल्लत के कारण बीमारियों का खतरा भी लगातार बना हुआ है।
मक्कापुर में हर दिन सुबह की शुरुआत पानी की जद्दोजहद से होती है। सुबह 4 बजे से ही महिलाएं बर्तन लेकर पानी के लिए लाइन में लग जाती हैं। घंटों इंतजार के बाद जब कहीं पानी मिलता है, तब वे सिर पर घड़े रखकर लंबी दूरी तय कर घर तक पहुंचाती हैं। वहीं पुरुष भी पीछे नहीं हैं, वे बाइक, कांवर और अन्य साधनों के जरिए दूर-दूर से पानी ढोने में जुटे रहते हैं। गांव में पानी के लिए रोजाना संघर्ष का यह मंजर किसी संकट से कम नहीं है।
ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि वर्षों से चली आ रही है। कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को इसकी जानकारी दी गई, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान देना जरूरी नहीं समझ रहे हैं, जिससे गांव के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि गांव में नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है, लेकिन आज तक एक बूंद पानी भी सप्लाई नहीं हो पाया है। इससे साफ जाहिर होता है कि योजनाएं कागजों में ही सीमित रह गई हैं और जमीनी स्तर पर उनका कोई असर नजर नहीं आ रहा है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर काफी नाराजगी है कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं उनके गांव तक पहुंचकर भी बेअसर साबित हो रही हैं।
इस पूरे मामले को लेकर पत्थलगांव विधायक एवं सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष गोमती साय का कहना है कि यह क्षेत्र ड्राई जोन में आता है, जिसके कारण गर्मियों में पानी की समस्या बढ़ जाती है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द ही इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। वहीं मिर्जापुर पंचायत के सरपंच जगदीश सिदार ने बताया कि पंचायत स्तर पर बोरिंग कराने का प्रयास किया गया था, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। अब नए स्थान पर बोरिंग कराने की योजना बनाई जा रही है।
अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन कब तक हरकत में आता है और मक्कापुर जैसे सुदूर गांव के लोगों को पानी जैसी बुनियादी सुविधा कब तक मिल पाती है। फिलहाल ग्रामीणों की प्यास और इंतजार दोनों जारी है
