लाखों की लागत से बने सॉसर पिट बना लापरवाही का स्मारक: अभ्यारण्य के इस बिट में मिट्टी-पत्तों से पटे पड़े जलस्रोत, भीषण गर्मी में पानी के अभाव में वन्य जीवों के गांवों की ओर भटकने का बढ़ा खतरा , रेंज कार्यालय से महज 2 किमी दूर होने के बावजूद जिम्मेदार बेखबर
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लाखों की लागत से बने सॉसर पिट बना लापरवाही का स्मारक: अभ्यारण्य के इस बिट में मिट्टी-पत्तों से पटे पड़े जलस्रोत, भीषण गर्मी में पानी के अभाव में वन्य जीवों के गांवों की ओर भटकने का बढ़ा खतरा , रेंज कार्यालय से महज 2 किमी दूर होने के बावजूद जिम्मेदार बेखबर

नारायणपुर 4 अफ़्रैल 2026 । भीषण गर्मी में वन्यजीवों की प्यास बुझाने के लिए बनाए गए सॉसर पिट (तश्तरीनुमा गड्ढे) अब खुद बदहाली की कहानी बयां कर रहे हैं। बादलखोल अभ्यारण्य के नारायणपुर रेंज अंतर्गत बरडाँड़ बिट में लाखों रुपये की लागत से तैयार किए गए ये जलस्रोत आज पूरी तरह उपेक्षा का शिकार हो चुके हैं। जिन गड्ढों को इस उद्देश्य से बनाया गया था कि जंगल के प्राकृतिक जलस्रोत सूखने पर उनमें टैंकरों या सोलर सिस्टम के जरिए पानी भरकर वन्यजीवों को राहत दी जा सके, वहीं आज वे गड्ढे मिट्टी और सूखे पत्तों से पटे पड़े हैं।

जानकारी के अनुसार इस क्षेत्र में सॉसर पिट के साथ बोर खनन कर सौर्य प्लेट के माध्यम से पानी की स्थायी व्यवस्था की गई थी, लेकिन निर्माण के कुछ ही महीनों बाद बोर खराब हो गया और सौर्य प्लेट भी बंद पड़ी है। हैरानी की बात यह है कि इसके बाद से न तो मरम्मत कराई गई और न ही गड्ढों की नियमित सफाई कर उनमें पानी भरने की कोई पहल की गई। जबकि विभागीय नियमों के मुताबिक इन सॉसर पिट की समय-समय पर निगरानी और सफाई जरूरी होती है, क्योंकि आंधी-तूफान और वन्यजीवों की आवाजाही से इनमें मिट्टी और पत्ते भर जाते हैं।

सबसे गंभीर बात यह है कि यह पूरा स्थल रेंज कार्यालय से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। विभाग के पास पानी सप्लाई और टंकी जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद इन गड्ढों को साफ कर पानी भरना जरूरी नहीं समझा जा रहा है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।नतीजा यह है कि लाखों की लागत से बना यह पूरा सिस्टम अब सिर्फ कागजों में ही जिंदा नजर आता है।

वर्तमान हालात में गड्ढों में पानी नहीं होने से अभ्यारण्य के वन्यजीवों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पानी की तलाश में जानवर जंगल से निकलकर रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है। साथ ही शिकार जैसी घटनाओं का खतरा भी बढ़ सकता है, जो वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को कमजोर करता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि उच्च अधिकारियों को स्थिति की पूरी जानकारी होने के बावजूद अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए ये सॉसर पिट आज अपनी बदहाली पर खुद सवाल खड़े कर रहे हैं। वन विभाग की लापरवाही का खामियाजा बेजुबान वन्यजीवों को भुगतना पड़ रहा है, जो इस तपती गर्मी में पानी की एक-एक बूंद के लिए भटकने को मजबूर हैं।

टैंकर और व्यवस्था सब होने के बाद भी सिस्टम फेल

बादलखोल अभ्यारण्य में वन्यजीवों के लिए पानी की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शासन की ओर से वन्य प्राणियों को गर्मी के दिनों में राहत देने के लिए दो पानी टैंकर उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर जंगल के भीतर बने सॉसर पिट और अन्य जलस्रोतों में पानी भरकर जानवरों की प्यास बुझाई जा सके। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।
नारायणपुर रेंज के अंतर्गत बरडाँड़ बिट में जहां सॉसर पिट सूखे पड़े हैं और मिट्टी-पत्तों से पट चुके हैं, वहीं इन टैंकरों का उपयोग वहां पानी भरने के लिए नहीं किया जा रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर ये टैंकर जा कहां रहे हैं और किस काम में लगाए जा रहे हैं। वन्यजीवों के लिए उपलब्ध कराए गए संसाधनों का सही उपयोग नहीं होना विभागीय लापरवाही की ओर साफ इशारा करता है।

उच्च अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई का अभाव कई सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि वन विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वन्यजीवों के लिए उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित किया जाता है या नहीं।

बादलखोल  अभ्यारण  सभी सर्किल बिट में सॉसर पिट का निर्माण हुआ है,फरवरी में सफाई कर पानी डालने का निर्देश दिया गया था ,फिर से सफाई और पानी भरने का निर्देशित किया जाएगा।

                       आशुतोष भगत 

    अधीक्षक -बादलखोल अभ्यारण्य  -नारायणपुर

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