बादलखोल अभ्यारण्य में तबादले का अनोखा गणित, साहीडाँड़ के डिप्टी रेंजर को हटा कर सरबकोम्बो और बच्छरांव से हटाकर साहीडाँड़ भेजी दरोगा को फिर बच्छरांव का ही अतिरिक्त प्रभार — जंगल की सुरक्षा पर उठे सवाल.....क्या खेला जा रहा कोई बड़ा गेम?


नारायणपुर 07 मार्च 2026 :- सरगुजा एलिफेंट रिजर्व के अंतर्गत आने वाले बादलखोल अभ्यारण्य के नारायणपुर रेंज में इन दिनों एक अजीबोगरीब तबादला आदेश चर्चा का विषय बन गया है। विभागीय आदेश के बाद कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि आखिर इस तबादले के पीछे क्या वजह है और किसके स्तर पर ऐसा निर्णय लिया गया है।
मिली जानकारी के अनुसार बच्छरांव सर्किल में पदस्थ दरोगा श्रीमती शांति खलखो को हटाकर साहीडाँड़ सर्किल में पदस्थ किया गया है। वहीं साहीडाँड़ सर्किल में पदस्थ डिप्टी रेंजर सुरेंद्र प्रधान को वहां से हटाकर सरबकोम्बो भेज दिया गया है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि बच्छरांव से हटाने के बावजूद श्रीमती शांति खलखो को उसी बच्छरांव सर्किल का अतिरिक्त प्रभार भी दे दिया गया है।
यानी एक ओर उन्हें बच्छरांव से स्थानांतरित किया गया, वहीं दूसरी ओर उसी सर्किल की जिम्मेदारी भी उनके पास रखी गई है। इस फैसले ने वन विभाग के भीतर और बाहर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब किसी कर्मचारी को एक सर्किल से हटाया गया है तो फिर उसी जगह का अतिरिक्त प्रभार देने का औचित्य क्या है।
बताया जाता है कि बादलखोल अभ्यारण्य का यह इलाका हर साल गर्मी के मौसम में काफी संवेदनशील हो जाता है। महुआ संग्रह, शिकार और अन्य अवैध गतिविधियों के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं लगातार सामने आती हैं। कई बार आग इतनी तेजी से फैलती है कि उसे नियंत्रित करने में वन अमले को काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
ऐसे में विभाग के इस फैसले को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि एक महिला कर्मचारी को दो सर्किल की जिम्मेदारी देकर क्या विभाग जंगल की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना चाहता है या फिर यह निर्णय किसी और वजह से लिया गया है।
सूत्रों की मानें तो संबंधित दरोगा स्थानीय कर्मचारी हैं और कई बार मुख्यालय में न रहकर घर से ही आना-जाना कर अपनी ड्यूटी निभाती हैं। ऐसे में दो अलग-अलग सर्किल की जिम्मेदारी संभालना कितना व्यावहारिक होगा, इसे लेकर भी चर्चा हो रही है।
बताया जाता है कि बच्छरांव सर्किल में कुल 3 बीट आते हैं,ओर साहीडाँड़ में 4 कुल 7 बिट जिनकी निगरानी और सुरक्षा अपने आप में बड़ी जिम्मेदारी मानी जाती है। पिछले वर्ष भी बच्छरांव सर्किल में काफी बड़े इलाके में जंगल में आग लगने की घटनाएं सामने आई थीं। इसके बावजूद उसी सर्किल का अतिरिक्त प्रभार फिर से उसी कर्मचारी को दिया जाना लोगों को समझ से परे लग रहा है।
स्थानीय लोगों और वन क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि गर्मी के मौसम में जंगलों में आग रोकने के लिए लगातार निगरानी, फायर वॉचरों के साथ तालमेल और मौके पर त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी होती है। यदि एक कर्मचारी दो-दो सर्किल का जिम्मा संभालेगा तो यह काम और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस तबादले के पीछे क्या कारण है। क्या उच्च अधिकारियों को किसी स्तर पर गलत जानकारी देकर यह आदेश जारी कराया गया है या फिर इसके पीछे विभाग के अंदर ही कोई अलग रणनीति काम कर रही है।
फिलहाल बादलखोल अभ्यारण्य में हुए इस तबादले को लेकर वन विभाग के गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है और आने वाले दिनों में इस फैसले के परिणाम क्या होंगे, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
