<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>महत्वपूर्ण समाचार - Kalam ki Awaz Feed</title><link>https://kalamkiawaz.com</link><description>Kalam ki Awaz Feed Description</description><item><title>Recipe : हर बार कुरकुरी और टेस्टी बनेगी भिंडी की सब्जी, बस फॉलो करें ये 5 टिप्स</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/182/recipe-bhindi-ki-sabzi-will-be-crispy-and-tasty-every-time-just-follow-these-5-tips</link><description>Lifestyle Desk : भिंडी बनाते समय उसमें से म्यूकिलेज नामक पदार्थ निकलता है, जिस वजह से भिंडी काफी चिपचिपी सी हो जाती है। यहां हम आपके लिए कुछ ऐसी टिप्स ले कर आए हैं, जिन्हें फॉलो कर के आप हर बार कुरकुरी भिंडी बना सकती हैं।


भिंडी उन सब्जियों में से एक है, जिसका स्वाद भी सभी को पसंद आता है और इसमें भरपूर पोषण भी होता है। भिंडी से स्वादिष्ट सूखी सब्जी, भरवां भिंडी, भिंडी दो प्याजा जैसी कई डिशेज बनाई जाती हैं। हालांकि इन सबमें एक कॉमन समस्या आती है, वो हैं भिंडी की चिपचिपाहट। भिंडी बनाते समय उसमें से म्यूकिलेज नामक पदार्थ निकलता है, जिस वजह से भिंडी काफी चिपचिपी सी हो जाती है। ये खाने में भी अच्छी नहीं लगती। भिंडी का मजा तो तब है, जब इसमें हल्का कुरकुरापन बरकरार रहे। यहां हम आपके लिए कुछ ऐसी ही सिंपल टिप्स ले कर आए हैं, जिन्हें फॉलो कर के आप हर बार कुरकुरी भिंडी बना सकती हैं।

भिंडी हमेशा बनेगी कुरकुरी
1) भिंडी में म्यूकिलेज नाम का एक प्राकृतिक पदार्थ होता है, जो इसे चिपचिपा बनाता है। भिंडी बनाते समय चिपचिपी न हो, इसके लिए साबुत भिंडी को अच्छी तरह से धोकर पहले पानी सुखा लें। पानी को सुखाने के लिए टिश्यू पेपर की मदद लें। कभी भी भिंडी को काटने के बाद धोने की गलती न करें।

2) जब भी आप सब्जी बनाने के लिए भिंडी काटें, तो उन्हें छोटे आकार में काटने की बजाय लंबे टुकड़ों में काटें। लंबे टुकड़ों में काटने से भिंडी अधिक क्रिस्पी बनेगी। बेहतर होगा कि आप भिंडी की एक फली को अधिकतम दो-तीन टुकड़ों में ही काटें।

3) भिंडी को अच्छी तरह से भूनकर भी आप इसकी चिपचिपाहट दूर कर सकती हैं। यह एक असरदार तरीका है। इसके लिए कड़ाही में तेल गर्म करने के बाद भिंडी के बड़े टुकड़ों को आठ से दस मिनट तक भूनें। इसके बाद ही किसी भी तरह की अन्य सामग्री को कड़ाही में डालें।

4) भिंडी की सब्जी बनाते वक्त उसमें शुरुआत में नमक डालने की गलती न करें। जब सब्जी पूरी तरह से तैयार हो जाए, तब उसमें स्वादानुसार नमक डालकर मिलाएं। मध्यम आंच पर तीन से चार मिनट तक सब्जी को पकाएं और गैस ऑफ कर दें।

5) भिंडी की सब्जी बनाएं तो अंत में इसमें थोड़ा नीबू का रस मिला दें। दही भी चिपचिपेपन की इस समस्या से छुटकारा देगा। इमली के जूस या अमचूर पाउडर का भी इस्तेमाल कर सकती हैं। सूखी सब्जी में अमचूर पाउडर या नीबू का रस डालें और गीली सब्जी में इमली का जूस या दही डालें।</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/182/recipe-bhindi-ki-sabzi-will-be-crispy-and-tasty-every-time-just-follow-these-5-tips</guid><pubDate>15-Sep-2025 3:06:32 pm</pubDate></item><item><title>History of 15 September : एक्सपेरिमेंटल टीवी से शुरू हुआ दूरदर्शन रामायण-महाभारत से घर-घर पहुंचा..आज देश का सबसे बड़ा ब्रॉडकास्टर</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/181/history-of-15-september-doordarshan-started-with-experimental-tv-and-reached-every-home-with-ramayana-mahabharata-today-it-is-the-biggest-broadcaster-of-the-country</link><description>History of 15 September; आज आप जब भी टीवी चालू करेंगे, कोई न कोई प्रोग्राम आपको जरूर मिल जाएगा। सैकड़ों टीवी चैनलों पर दिनभर अलग-अलग तरह के प्रोग्राम आते रहते हैं, लेकिन आज से कुछ दशकों पहले स्थिति ऐसी नहीं थी। भारत में आज ही के दिन 1959 में दूरदर्शन शुरू हुआ था। शुरुआत में दूरदर्शन पर हफ्ते में केवल 3 दिन ही प्रोग्राम ब्रॉडकास्ट किए जाते थे, वो भी केवल आधा घंटे के लिए।

भारत में दूरदर्शन की शुरुआत एक्सपेरिमेंट के तौर पर हुई थी और इसे नाम दिया गया था - टेलीविजन इंडिया। शुरुआत में स्कूली बच्चों और किसानों के लिए शैक्षणिक कार्यक्रम प्रसारित किए जाते थे और इसका संचालन ऑल इंडिया रेडियो करता था। 1965 से रोजाना कार्यक्रम प्रसारित किए जाने लगे।

1975 में देश के 6 राज्यों में सैटेलाइट इन्स्ट्रक्शनल टेलीविजन एक्सपेरिमेंट (SITE) शुरू किया गया। इन राज्यों में सामुदायिक टेलीविजन सेट लगाए गए। 1976 में दूरदर्शन ऑल इंडिया रेडियो से अलग हो गया।

1982 का साल भारत में टीवी के लिए महत्वपूर्ण था। इसी साल दूरदर्शन ने इनसैट-1 के जरिए पहली बार नेशनल ब्रॉडकास्ट किया। एशियाई खेलों के प्रसारण ने तो दूरदर्शन की लोकप्रियता को कई गुना बढ़ा दिया था। यहीं से टीवी का कायापलट हुआ। नए-नए प्रोग्राम बनने लगे। धीरे-धीरे सुबह और फिर दोपहर को प्रोग्राम प्रसारित होने लगे। शाम को रोज प्रसारित होने वाला कृषि दर्शन, हफ्ते में दो बार चित्रहार और रविवार को आने वाली रंगोली की लोकप्रियता की बराबरी आज का कोई प्रोग्राम नहीं कर सकता। 1966 में शुरू हुए कृषि दर्शन का योगदान देश में हरित क्रांति लाने में भी रहा है।

अप्रैल 2020 में रामायण का दूरदर्शन पर दोबारा ब्रॉडकास्ट किया गया। 16 अप्रैल 2020 को रामायण को 7.7 करोड़ लोगों ने देखा था, जो किसी भी इंटरटेनमेंट शो को एक दिन में मिली सबसे ज्यादा व्यूअरशिप है।
एक्सपेरिमेंटल टीवी के तौर पर शुरू हुए दूरदर्शन के आज 34 सैटेलाइट चैनल हैं। दूरदर्शन के पास देशभर में 66 स्टूडियो हैं, जिनमें से 17 राज्यों की राजधानियों में हैं और बाकी 49 अलग-अलग शहरों में हैं। दूरदर्शन देश का सबसे बड़ा ब्रॉडकास्टर है।

आज इंजीनियर्स डे आज इंजीनियर्स डे है, जिसे मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के जन्मदिन पर मनाया जाता है। उनका जन्म 15 सितंबर 1861 को कर्नाटक में कोलार जिले के चिक्काबल्लापुर तालुका में हुआ था। उनके पिता श्रीनिवास शास्त्री संस्कृत के विद्वान और आयुर्वेद चिकित्सक थे। वर्ष 1883 में इंजीनियरिंग की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण करने वाले एम. विश्वेश्वरैया का पसंदीदा विषय सिविल इंजीनियरिंग था। करियर के आरंभिक दौर में ही एम. विश्वेश्वरैया ने कोल्हापुर, बेलगाम, धारवाड़, बीजापुर, अहमदाबाद एवं पूना समेत कई शहरों में जल आपूर्ति परियोजनाओं पर खूब काम किया था।

1960 में भारत सरकार ने विश्वेश्वरैया पर डाक टिकट जारी किया था।
1909 में उन्हें मैसूर राज्य का मुख्य अभियंता नियुक्त किया गया। वे रेलवे सचिव भी थे। कृष्णराज सागर बांध के निर्माण के कारण मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का नाम पूरे विश्व में सबसे अधिक चर्चा में रहा था। बांध के स्वचलित दरवाजों की जिस तकनीक का इस्तेमाल किया, उसे यूरोप सहित विश्व के अन्य देशों ने भी अपनाया। विश्वेश्वरैया औद्योगिक विकास के समर्थक थे। वे उन शुरुआती लोगों में से एक थे, जिन्होंने बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान में धातुकर्म विभाग, वैमानिकी, औद्योगिक दहन एवं इंजीनियरिंग जैसे अनेक नए विभागों को आरंभ करने का स्वप्न देखा था। 1955 में उन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

1894: चीन और जापान के बीच शुरू हुआ था पहला युद्ध

1894-95 में चीन-जापान युद्ध कोरिया पर प्रशासनिक तथा सैन्य नियंत्रण को लेकर लड़ा गया था। जापान की मेइजी सेना इसमें विजयी हुई थी जिसके चलते कोरिया और ताइवान का नियंत्रण जापान के हाथ में चला गया। इस युद्ध में हार के कारण चीन को जापान के आधुनिकीकरण का लाभ समझ में आया और बाद में चिंग राजवंश के खिलाफ 1911 में क्रांति हुई। जापान ने अपने साम्राज्यवाद का मुख्य लक्ष्य चीन को बनाया और सर्वप्रथम कोरिया में उसने चीन के साथ अपनी शक्ति का प्रयोग किया।

कोरिया अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से जापान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था। इसलिए कोरिया प्रायद्वीप में जापान की बहुत रुचि थी। चीन के मंचू सम्राटों ने 17वीं शताब्दी में कोरिया पर अधिकार कर लिया था और तभी से कोरिया चीन का अधीन प्रदेश माना जाता था। कोरिया का स्वतंत्र राजा चीन के सम्राट को अपना सबकुछ मानता था। इस तरह कोरिया का राज्य चीन के एक संरक्षित राज्य के समान था। कोरिया प्रायद्वीप में जापान का परंपरागत स्वार्थ था जो इस युद्ध का कारण बना।

15 सितंबर के दिन को इतिहास में और किन-किन महत्वपूर्ण घटनाओं की वजह से याद किया जाता है...

2004ः ब्रिटिश नागरिक गुरिंदर चड्ढा को 'वुमन आफ द ईयर' सम्मान।

2003ः सिंगापुर के मुद्दे पर विकासशील देशों के भड़क उठने से डब्ल्यूटीओ वार्ता विफल।

2002ः न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के अवसर पर भारत, चीन एवं रूस के विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित।

2001ः अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति को अफगानिस्तान पर सैनिक कार्यवाही की मंजूरी दी।

1981ः वानुअतु संयुक्त राष्ट्र संघ का सदस्य बना।

1982 : लेबनान के निर्वाचित राष्ट्रपति बशीर गेमायेल की पदासीन होने से पहले ही बम विस्फोट में हत्या।

1971ः हरी-भरी और शांति पूर्ण दुनिया के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध ग्रीन पीस की स्थापना की गई।

1948ः स्वतंत्र भारत का पहला ध्वजपोत आईएनएस दिल्ली बंबई (अब मुंबई) के बंदरगाह पर पहुंचा।

1927 : प्रसिद्ध कवि एवं साहित्यकार सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का जन्म हुआ।</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/181/history-of-15-september-doordarshan-started-with-experimental-tv-and-reached-every-home-with-ramayana-mahabharata-today-it-is-the-biggest-broadcaster-of-the-country</guid><pubDate>15-Sep-2025 6:36:21 am</pubDate></item><item><title>Recipe : हर कोई करेगा आपके पराठों की तारीफ, सॉफ्ट और परतदार बनाने के लिए फॉलो करें ये 6 टिप्स</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/180/recipe-everyone-will-praise-your-parathas-follow-these-6-tips-to-make-them-soft-and-flaky</link><description>Recipe ; हर कोई करेगा आपके पराठों की तारीफ, सॉफ्ट और परतदार बनाने के लिए फॉलो करें ये 6 टिप्स.....

1

ऐसे बनाएं टेस्टी पराठे
रोटी के अलावा सबसे ज्यादा बनने वाली चीज है पराठा। खासतौर से टिफिन में देने के लिए या फिर सुबह नाश्ते के लिए ज्यादातर पराठे ही बनते हैं। सबसे अच्छी बात है कि इन्हें खाने के लिए सब्जी ना भी हो तो चलता है, क्योंकि अचार और दही के साथ ही ये बड़े स्वाद लगते हैं। हालांकि अच्छे पराठे बनाना भी एक आर्ट है। पराठे ऐसे होने चाहिए जो सॉफ्ट हों और परतदार हो, जिन्हें खा कर मजा आ जाए। आज हम आपको कुछ बड़ी सिंपल टिप्स बता रहे हैं, जो बढ़िया पराठे बनाने में काम आएंगी। अगर आप ज्यादा कुकिंग नहीं करते हैं, तो आपको ये जरूर जाननी चाहिए।

2

ऐसे लगाएं आटा
प्लेन पराठे बनाने के लिए गेहूं का आटा लें और उसमें थोड़ा सा नमक जरूर मिलाएं। इसके अलावा दो चम्मच तेल या देसी घी डालें, फिर थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाकर आटा गूंथ लें। तेल डालने से आटा सॉफ्ट लगता है और पराठे खूब फ्लैकी और सॉफ्ट बनते हैं।

3

आटे को रेस्ट करने दें
ज्यादातर लोग आटा लगाने के तुरंत बाद पराठे बनाना शुरू कर देते हैं, जो गलत है। आपको आटा लगाने के बाद उसे कम से कम 10-15 मिनट के लिए रेस्ट करने देना चाहिए। इससे आटा अच्छी तरह सेट हो जाता है और पराठे टेस्टी बनते हैं।

4

सूखा आटा इस्तेमाल करें
पराठा बनाने के लिए छोटी-छोटी लोइयां बनाएं और उन्हें सूखा आटा लगाकर बेल लें। इससे बेलने में भी आसानी होगी। ध्यान रहे ज्यादा प्रेशर लगाकर पराठा ना बेलें, इससे वो कहीं से मोटे रहेंगे तो कहीं से बहुत पतले हो जाएंगे।

5

पराठे में तेल और आटा लगाएं
अब जब आप गोल पराठा बेल लें, तो उसपर थोड़ा सा तेल और सूखा आटा लगाएं। इसके बाद पराठे को बीच से मोड़ दें, दोबारा तेल और सूखा आटा लगाएं और फिर मोड़ दें। कुल मिलाकर आपको पराठे को ट्राएंगल यानी तिकोने शेप में बेल लेना है। लास्ट में दोबारा पराठे पर सूखा आटा लगा लें।

6

मसाला लगाकर भी बना सकती हैं
अगर आप पराठे को थोड़ा चटपटा स्वाद देना चाहती हैं, तो सूखा आटा और तेल के अलावा पराठे पर लाल मिर्च, चाट मसाला, अजवाइन, धनिया पाउडर, सौंफ पाउडर और कसूरी मेथी लगाकर भी बना सकती हैं। इससे खूब स्वादिष्ट मसाला पराठा बनता है।

7

ऐसे सेंके पराठा
पराठे को हमेशा मीडियम आंच पर सेंके। सबसे पहले दोनों तरफ से हल्का-हल्का सेंक लें। अब एक तरह तेल लगाएं और सेंके। दूसरी तरफ भी ऐसा ही करें। दोनों तरफ से जब पराठे पर ब्राउन स्पॉट्स आ जाएं, तो हो गए आपके पराठे रेडी।</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/180/recipe-everyone-will-praise-your-parathas-follow-these-6-tips-to-make-them-soft-and-flaky</guid><pubDate>14-Sep-2025 2:30:59 pm</pubDate></item><item><title>History 14 September : आज पूरा देश मना रहा है हिंदी दिवस..पढ़ें इससे जुड़ा इतिहास..जाने और प्रमुख घटनाएं</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/179/history-14-september-today-the-whole-country-is-celebrating-hindi-diwas-read-the-history-related-to-it-know-other-important-events</link><description>History 14 September: इतिहास के पन्नो में आज का दिन (aaj ka itihas) बेहद खास है. आज यानी 14 सितंबर (14 september ka itihas) ही वो तारीख है जब साल 1949 में 'हिंदी' (Hindi diwas) को भारत की राजभाषा का दर्जा मिला. आइये जानते हैं कैसे बनी हिंदी हमारी राजभाषा. आजादी के बाद भारत की राजभाषा का मुद्दा सबसे अहम और विवादित था. विवादित इसलिए क्योंकि भारत में सैकड़ों भाषाएं और बोलियां बोली जाती हैं, ऐसे में राजभाषा का दर्जा किसे दिया जाए ये सवाल अहम था. काफी सोच- विचार के बाद संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी 'हिंदी' को राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकारा. 14 सितंबर 1949 को सर्वसम्मति से संविधान सभा ने इसपर मुहर लगा दी. तब प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस दिन के महत्व को देखते हुए 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाए जाने सलाह दी. पहला हिंदी दिवस साल 1953 में मनाया गया.

अंतरिक्ष विज्ञान की नजर से भी आज का दिन खास है. आज यानी 14 सितंबर साल 1959 को रुसी अंतरिक्ष मिशन 'लूना-2' चांद की सतह से टकराया (first moon mission) था. बता दें ये दुनिया का पहला अंतरिक्ष यान था जिसने चांद की सतह को छूने में कामयाबी हासिल की थी. आपको बता दें इस मिशन को सोवियत संघ ने पूरी तरह गुप्त रखा था. दुनिया को इसकी भनक तक नहीं थी. 14 सितंबर को लूनिक -2, 12 हजार किलोमीटर की रफ़्तार से जब चांद से टकराया तो तहस-नहस हो गया. ये वो दौर था जब अमेरिका और सोवियत संघ के बीच कोल्ड वॉर चल रहा था. दोनों एक दूसरे को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे. ऐसे समय में इस मिशन का फेल होना सोवियत रूस के लिए बड़ा झटका था लेकिन इससे इतर ये पहला मौक़ा था जब किसी स्पेसक्राफ्ट ने चन्द्रमा की सतह को छुआ था. ये कामयाबी इससे बड़ी थी.

आज का इतिहास भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से भी अहम है. आज ही के दिन साल 2000 में तब के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई (Atal Bihari Vajpayee) ने अमेरिकी संसद में को सम्बोधित किया था. उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा था कि भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए व्यापक-आधारित द्विदलीय समर्थन का यह प्रदर्शन उत्साहजनक है. यह राष्ट्रपति क्लिंटन और मेरे लिए प्रोत्साहन का स्रोत है, क्योंकि हम अपने संबंधों में एक नई गुणवत्ता लाने के लिए मिलकर काम करते हैं.

देश-दुनिया में 14 सितंबर का इतिहास
1770 : डेनमार्क में प्रेस की स्वतंत्रता को मान्यता मिली।

1833 : विलियम वेंटिक, पहले गवर्नर जनरल के तौर पर भारत आए।
1901 : अमेरिकी राष्ट्रपति विलियम मैकेंजी की गोली मारकर हत्या।
1917 : रूस को आधिकारिक तौर पर गणतंत्र घोषित किया गया।
1949 : संविधान सभा ने हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया।
1959 : सोवियत संघ का अंतरिक्ष यान पहली बार चंद्रमा की सतह पर उतरा।
1960 : खनिज तेल उत्पादक देशों ने मिलकर ओपेक की स्थापना की।
1998 : माइक्रोसॉफ्ट, जनरल इलेक्ट्रिक को पीछे छोड़कर दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बनी।
2000 : माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज एम.ई. लांच किया।
2001 : अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को पकड़ने के अभियान के लिए अमेरिका में 40 अरब डॉलर मंजूर किए गए।
2000 : प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अमेरिकी सीनेट के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को सम्बोधित किया।
2007 : जापान ने तानेगाशिया स्थित प्रक्षेपण केन्द्र से पहला चन्द्र उपग्रह एच-2ए प्रक्षेपित किया ।
2008 : रूस के पेर्म हवाई अड्डे पर एअरोफ़्लोत का विमान दुर्घटनाग्रस्त। विमान में सवार सभी 88 लोगों की मौत।</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/179/history-14-september-today-the-whole-country-is-celebrating-hindi-diwas-read-the-history-related-to-it-know-other-important-events</guid><pubDate>14-Sep-2025 6:39:45 am</pubDate></item><item><title>Sabudana Chaat Recipe : तेल के बिना बनाएं साबूदाना चाट, पोषण का भंडार ये है रेसिपी, वेट लॉस में भी फायदेमंद</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/178/sabudana-chaat-recipe-make-sabudana-chaat-without-oil-this-recipe-is-a-storehouse-of-nutrition-also-beneficial-in-weight-loss</link><description>Sabudana Chaat Recipe: क्या आपने कभी साबूदाना चाट की हेल्दी रेसिपी को ट्राई किया है? आपको बता दें कि इस रेसिपी को बनाने के लिए आपको न तो ज्यादा फैंसी सामग्री चाहिए और न ही ज्यादा समय।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साबूदाना चाट बनाने के लिए आपको एक कप भीगा हुआ साबूदाना (कम से कम 4-5 घंटे के लिए या फिर रात भर के लिए), हाफ कप भुनी हुई मूंगफली, 2 बॉइल्ड कटे हुए आलू, एक बारीक कटा हुआ टमाटर, एक बारीक कटा हुआ खीरा, 2 बारीक कटी हुई हरी मिर्च, 2 स्पून बारीक कटा हुआ हरा धनिया, 2 स्पून नींबू का रस, सेंधा नमक, हाफ स्पून काली मिर्च पाउडर और हाफ स्पून जीरा पाउडर चाहिए होगा।

पहला स्टेप- सबसे पहले साबूदाने को अच्छी तरह से धो लीजिए। अब साबूदाने को पानी में भिगोकर रख दीजिए। पानी ज्यादा नहीं होना चाहिए, बस साबूदाना डूब जाए, इतने ही पानी का इस्तेमाल करें।

दूसरा स्टेप- साबूदाने के फूल जाने के बाद आप एक्स्ट्रा पानी को निकाल दीजिए। इसके बाद एक कड़ाही में मूंगफली को हल्की आंच पर गोल्डन और क्रंची होने तक भून लीजिए।

तीसरा स्टेप- जब मूंगफली ठंडी हो जाए, तब मूंगफली को छीलकर थोड़ा सा क्रश कर लीजिए।

चौथा स्टेप- एक कटोरे में भीगा हुआ साबूदाना, बॉइल्ड आलू, बारीक कटा हुआ टमाटर, खीरा, हरी मिर्च और हरा धनिया निकाल लीजिए।

पांचवां स्टेप- इसी कटोरे में भुनी हुई और क्रश्ड मूंगफली, सेंधा नमक, काली मिर्च पाउडर और जीरा पाउडर एड कर सभी चीजों को अच्छी तरह से मिला लीजिए।

छठा स्टेप- आखिर में आप इस मिक्सचर में नींबू का रस भी मिक्स कर सकते हैं। बस साबूदाना चाट सर्व करने के लिए तैयार है।

बच्चों से लेकर बड़ों तक, सभी को साबूदाना चाट का टेस्ट काफी ज्यादा पसंद आने वाला है। सबसे अच्छी बात ये है कि आप इस रेसिपी को व्रत के दिन भी ट्राई कर सकते हैं। साबूदाना में मौजूद तत्व न केवल आपको इंस्टैंट एनर्जी प्रदान कर सकते हैं बल्कि आपकी वेट लॉस जर्नी को बूस्ट करने में भी कारगर साबित हो सकते हैं।</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/178/sabudana-chaat-recipe-make-sabudana-chaat-without-oil-this-recipe-is-a-storehouse-of-nutrition-also-beneficial-in-weight-loss</guid><pubDate>13-Sep-2025 2:52:09 pm</pubDate></item><item><title>History of 13 September : पाकिस्तान की हरकत से नाराज हुए सरदार पटेल ने तय किया था- कश्मीर भारत का हिस्सा बनेगा..जाने और प्रमुख घटनाएं</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/177/history-of-13-september-sardar-patel-angry-with-pakistan-s-actions-had-decided-that-kashmir-will-become-a-part-of-india-know-more-important-events</link><description>History of 13 September; 1947 में भारत को आजादी के साथ-साथ कई समस्याएं भी मिली थीं। इनमें से एक बड़ी समस्या रियासतों के विलय की थी। ज्यादातर रियासतें भारत में आसानी से शामिल हो गई थीं, लेकिन कुछ रियासतें ऐसी थीं जो आजादी की घोषणा कर चुकी थीं। इनमें से एक रियासत थी कश्मीर, जो आज भी भारत-पाकिस्तान के टकराव का मुद्दा बना हुआ है।

इन रियासतों को भारत में शामिल कराने की जिम्मेदारी मिली थी सरदार पटेल को। कश्मीर के राजा हरीसिंह ने अपनी रियासत जम्मू-कश्मीर को स्वतंत्र रखने का फैसला लिया। हरीसिंह का मानना था कि कश्मीर यदि पाकिस्तान में मिलता है तो जम्मू की हिन्दू जनता के साथ अन्याय होगा और अगर भारत में मिलता है तो मुस्लिम जनता के साथ अन्याय होगा।

भारत की आजादी से दो महीने पहले तक लॉर्ड माउंटबेटन ने कश्मीर के राजा महाराजा हरीसिंह से कहा था कि यदि वे पाकिस्तान के साथ जाने का फैसला करते हैं, तो भारत कोई दखल नहीं देगा। ये बात लॉर्ड माउंटबेटन के राजनीतिक सलाहकार रहे वीपी मेनन की किताब 'इंटिग्रेशन ऑफ द इंडिया स्टेट्स' में लिखी है।

सरदार पटेल के साथ कश्मीर के राजा हरी सिंह।
सरदार पटेल भी हैदराबाद के बदले पाकिस्तान को कश्मीर देने के लिए राजी थे। 13 सितंबर 1947 की सुबह पटेल ने रक्षा मंत्री बलदेव सिंह को चिट्ठी लिखी कि कश्मीर चाहे तो पाकिस्तान में शामिल हो सकता है। इसी दिन पटेल को जब पता चला कि पाकिस्तान ने जूनागढ़ के विलय का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है, तो वे भड़क गए।

उनका कहना था कि यदि पाकिस्तान, हिंदू बहुल आबादी वाले मुस्लिम शासक के जूनागढ़ को अपना हिस्सा बना सकता है तो भारत, मुस्लिम बहुल आबादी वाले हिंदू शासक के कश्मीर को क्यों नहीं ले सकता? उस दिन से कश्मीर पटेल की प्राथमिकता बन गया था।

1948: सरदार पटेल के आदेश पर हैदराबाद में सेना घुसी थी

आजादी के बाद हैदराबाद के नवाब मीर उस्मान अली ने अपनी रियासत को आजाद रखने का फैसला लिया था। वो चाहता था कि हैदराबाद का संबंध सिर्फ ब्रिटिश सम्राट से ही रहे।

हैदराबाद कांग्रेस चाह रही थी कि हैदराबाद का विलय भारत में हो, लेकिन दूसरी तरफ इत्तेहादुल मुस्लिमीन नाम का संगठन निजाम का समर्थन कर रहा था।

हैदराबाद में रजाकारों ने अपनी अलग सेना तैयार कर ली थी।
पटेल ने 13 सितंबर 1948 को भारतीय सेना को हैदराबाद पर चढ़ाई करने का आदेश दे दिया। इसे ऑपरेशन पोलो कहा गया। 3 दिनों के भीतर ही भारतीय सेना ने हैदराबाद पर कब्जा कर लिया। इस ऑपरेशन में 42 भारतीय सैनिक शहीद हुए और 2 हजार रजाकार मारे गए। हालांकि, अलग-अलग लोग इस आंकड़े को काफी ज्यादा बताते हैं। 17 सितंबर 1948 को निजाम ने हैदराबाद के भारत में विलय की घोषणा की।

1929: जतिंद्र नाथ दास की शहादत

भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत को हम शहीद दिवस के तौर पर याद करते हैं, लेकिन उनके ही साथी थे- जतिंद्र नाथ दास, जिन्हें जतिन दा भी कहा जाता था। 27 अक्टूबर 1904 को जन्मे जतिंद्र नाथ 16 साल की उम्र में ही आजादी के आंदोलन से जुड़ गए थे। दक्षिणेश्वर बम कांड और काकोरी कांड के सिलसिले में 1925 में उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

जतिंद्र नाथ दास की शहादत के 50 साल पूरे होने पर भारत सरकार ने उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया था।
सबूत नहीं थे, इस वजह से मुकदमा नहीं चला, पर उन्हें नजरबंद रखा गया। लाहौर असेंबली में बम फेंकने के मामले में भगत सिंह के साथियों के साथ ही जतिन दा भी पकड़े गए थे। जेल में अव्यवस्था के खिलाफ क्रांतिकारियों ने जतिन दा के नेतृत्व में 13 जुलाई 1929 को अनशन शुरू किया। उनका अनशन खत्म करने की हर कोशिश की गई, लेकिन वे टस से मस नहीं हुए।

हड़ताल के 63वें दिन जतिन दास के कहने पर एक साथी ने एकला चलो रे और फिर वन्दे मातरम् गाया। यह गीत पूरा होते ही जतिन दा ने 13 सितंबर 1929 को सिर्फ 24 साल की उम्र में दुनिया से विदाई ले ली।

13 सितंबर के दिन को इतिहास में किन-किन महत्वपूर्ण घटनाओं की वजह से याद किया जाता है...

2013: तालिबान आतंकवादियों ने अफगानिस्तान के हेरात में अमेरिका के वाणिज्य दूतावास पर हमला किया।

2009: चन्द्रमा पर बर्फ खोजने का इसरो-नासा का अभियान असफल हुआ।

2008: दिल्ली में तीन स्थानों पर 30 मिनट के अंतराल में चार बम विस्फोट हुए। इनमें 19 लोगों की मौत हुई और 90 से अधिक घायल हुए।

2007: नासा के वैज्ञानिकों ने बृहस्पति से तीन गुना बड़े ग्रह का पता लगाया।

2002: इजराइल ने फिलिस्तीन अधिकृत गाजा पट्टी पर हमला किया।

2000: भारत के विश्वनाथन आनंद ने शेनयांन में पहला फ़िडे शतरंज विश्व कप जीता।

1947: भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 40 लाख हिंदुओं और मुसलमानों के पारस्परिक स्थानांतरण का सुझाव दिया।

1933: एलिजाबेथ मेकॉम्ब्स न्यूजीलैंड की संसद में पहुंचने वाली पहली महिला बनीं। उन्होंने लिटिलटन से चुनाव जीता। इससे पहले ये सीट उनके पति के पास थी।

1923: स्पेन में सैन्य तख्ता पलट हुआ। मिगेल डे प्रिमो रिवेरा ने सत्ता संभाली और तानाशाह सरकार की स्थापना की। ट्रेड यूनियनों को 10 साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया।

1922: लीबिया के एल अजिजिया में धरती पर उच्चतम तापमान दर्ज किया गया। उस समय छाया में नापा गया तापमान 58 डिग्री सेल्सियस था।</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/177/history-of-13-september-sardar-patel-angry-with-pakistan-s-actions-had-decided-that-kashmir-will-become-a-part-of-india-know-more-important-events</guid><pubDate>13-Sep-2025 5:17:52 am</pubDate></item><item><title>History 12 september : आज ही के दिन चांद पर पहुंचा था लूना-2 रॉकेट..पूर्व PM इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी का हुआ था जन्म..जाने और प्रमुख घटनाएं</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/176/history-12-september-on-this-day-luna-2-rocket-reached-the-moon-former-pm-indira-gandhi-s-husband-feroze-gandhi-was-born-know-more-important-events</link><description>History of 12 September; देश दुनिया के इतिहास में 12 सितंबर की तारीख तमाम अहम वजह से दर्ज है. ये तारीख सारागढ़ी युद्ध में सिख सैनिकों के शौर्य और पराक्रम की गवाह है. 1897 में हुए सारागढ़ी के युद्ध की आज 126वीं वर्षगांठ है.
यूं तो सिख सैनिकों को उनके अदम्य साहस और निडरता के लिए दुनिया भर में जाना जाता है, लेकिन 126 साल पहले, 10 हजार अफगान हमलावरों को सिख सैनिकों के साहसी और निडर रूप की जबर्दस्त झलक देखने को मिली. सारागढ़ी की लड़ाई वर्ष 1897 में समाना रिज पर लड़ी गई थी, जो अब पाकिस्तान में है.

सारागढ़ी एक सुरक्षा चौकी थी, जिसे यह सुनिश्चित करने के लिए स्थापित किया गया था कि लॉकहार्ट किले और गुलिस्तान किले के बीच संचार बिना किसी बाधा के जारी रहे. इस दिन 14 हजार पठानों को सिर्फ 21 सिखों ने हराया था. इन मुट्ठी भर सैनिकों की अतुलनीय वीरता के कारण सारागढ़ी की लड़ाई को दुनिया की सबसे बड़ी लड़ाइयों में से एक माना जाता है.

इसके अलावा साल 1959 में आज ही के दिन तत्कालीन सोवियत संघ का रॉकेट लूना 2चांद पर पहुंचा था. ये एक बड़ी कामयाबी थी, जिससे अमेरिका बेचैन हो गया था और दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष में एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ यानी स्पेस रेस शुरू हो गई थी.
हजारों-लाखों साल के मानव इतिहास में यह पहला मौका था, जब इंसान की बनाई कोई चीज चांद पर पहुंची थी. इसके साथ ही सोवियत संघ ने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक और झंडा गाड़ दिया था.

आज का दिन गांधी परिवार के लिए भी खास है. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पति और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के दामाद फिरोज गांधी का जन्म आज ही के दिन 1912 में हुआ था. फिरोज गांधी पत्रकार होने के साथ-साथ स्वतंत्रता सेनानी भी थे. उन्होंने देश की आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था.
इसी बीच 1928 में फिरोज गांधी ने साइमन कमीशन के मुखर विरोधी रहे. इसके बाद 1930-32 के आंदोलन में उन्हें जेल की सजा भी हुई थी.

देश-दुनिया में 12 सितंबर का इतिहास-
1966: भारतीय तैराक मिहिर सेन ने डार्डानेलेस जलडमरूमध्य को तैरकर पार किया.
1962 : प्रसिद्ध रचनाकार रांगेय राघव का निधन हुआ था.
1968 : अल्बानिया ने खुद को वारसा संधि से अलग करने की घोषणा की.
1983 : भारतीय अभिनेता, गायक, पत्रकार और लेखक रंजन का निधन हुआ था.
1990 : पूर्व और पश्चिम जर्मनी को एकीकृत करने के लिए अमेरिका, इंग्लैण्ड, फ्रांस, सोवियत संघ, पूर्व और पश्चिम जर्मनी ने समझौते पर हस्ताक्षर किये.
1398 : तैमूर लंग सिंधु नदी के तट पर पहुंचा.
1928 : फ्लोरिका में भीषण तूफाने से 6 हजार लोगों की मौत.
2001 : अमेरा ने आतंकवाद के खिलाफ जंग का ऐलान किया.
1873 : पहला व्यवहारिक टाइपराइटर ग्राहकों को बेचा गया.
2007: रूस ने नॉन न्यूक्लियर वैक्यूम बम (इको फ़्रेंडली बम) का परीक्षण किया।</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/176/history-12-september-on-this-day-luna-2-rocket-reached-the-moon-former-pm-indira-gandhi-s-husband-feroze-gandhi-was-born-know-more-important-events</guid><pubDate>12-Sep-2025 5:41:36 am</pubDate></item><item><title>Recipe : इस पेशावरी खीर के दुनियाभर में हैं लाखों दीवाने..खाने में रबड़ी से भी स्वादिष्ट..पेशावर की खीर, रेसिपी</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/175/recipe-there-are-millions-of-fans-of-this-peshawari-kheer-all-over-the-world-it-is-tastier-than-rabri-peshawari-kheer-recipe</link><description>Lifestyle Desk; त्योहारों पर मीठे में खीर बनाने का चलना सालों पुराना है। जब मिठाइयां नहीं हुआ करती थीं तो मीठे में हलवा और खीर ही ज्यादातर घरों में बनती थी। खारी का स्वाद बच्चों और बड़ों सभी को पसंद आता है। चावल और दूध से तैयार खीर खाने में बहुत टेस्टी लगती है। अगर आपको खीर खाना पसंद है तो एक बार पेशावर की फेमस खीर जरूर ट्राई करें। इस खीर के दीवाने दुनियाभर में है। फटाफट नोट कर लें रेसिपी।

पेशावर की फेमस खीर, नोट करें रेसिपी
पहला स्टेप- खीर को बनाने के लिए पके हुए उबले चावल करीब 1 कटोरी लें। चावल को मिक्सर में डालें और इसमें 4 रस्क यानि टोस्ट डाल दें। आधा कटोरी मिक्स पाउडर और आधा कप गाढ़ा दूध डालें। सारी चीजों को मिलाकर पीस लें। बिना गांठ वाला स्मूद पेस्ट जैसा तैयार करना है।

दूसरा स्टेप- एक गहरा और भारी तली का बर्तन लें और उसमें करीब 1 लीटर दूध डालें। दूध में थोड़ी चीनी, भीगे हुए केसर के धागे, इलायची पाउडर और बारीक कटे हुए मेवा डालकर दूध को पकाएं। दूध को मीडियम और लो फ्लेम पर करीब 10 मिनट के लिए उबाल लें।

तीसरा स्टेप- अब आपको दूध में चावल और रस्क से तैयार किया हुआ पेस्ट डालना है। इसे डालते हुए लगातार चलाते रहें जिससे गांठ न पड़ें। अब चावल के मिक्सचर के साथ करीब 10-15 मिनट के लिए खीर को मीडियम फ्लेम पर और पकन दें। खीर को थोड़ा गाढ़ा होने तक पकाना है।

चौथा स्टेप- अब आपको खीर में केरेमल सीरप बनाकर डालना है। इसके लिए एक पैन में 2 बड़े चम्मच चीनी डालें। चीनी को बिना हिलाए धीमी आंच पर पिघलने तक पकाएं। चीनी गोल्डन ब्राउन होकर सीरप बन जाएगी। इस तुरंत खीर में डाल दें और खीर को चलाते रहें।

पांचवां स्टेप- पेशावर की फेमस खीर बनकर तैयार है। इसके ऊपर थोड़े कटे हुए नट्स और गुलाब की सूखी पत्तियां डालकर फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दें। 4-5 घंटे के बाद खीर को ठंडा होने पर सर्व करें। एक बार ये खीर खाएंगे तो रबड़ी से भी स्वाद लगेगी।</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/175/recipe-there-are-millions-of-fans-of-this-peshawari-kheer-all-over-the-world-it-is-tastier-than-rabri-peshawari-kheer-recipe</guid><pubDate>11-Sep-2025 2:05:38 pm</pubDate></item><item><title>History of 11 September  : 1893 का शिकागो धर्म सम्मेलन और स्वामी विवेकानंद का ओजस्वी भाषण..जाने और प्रमुख घटनाएं</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/174/history-of-11-september-chicago-religious-conference-of-1893-and-swami-vivekananda-s-powerful-speech-know-other-important-events</link><description>History of 11 September : आज से 132 वर्ष पूर्व आज ही के दिन अमेरिका के शिकागो नगर में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में भारत के महान दार्शनिक और संत स्वामी विवेकानंद ने अपने ऐतिहासिक भाषण से पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया।

स्वामी विवेकानंद ने संबोधन की शुरुआत अमेरिका की बहनों और भाइयों कहकर की, जिसे सुनकर सभा तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठी। यह संबोधन केवल श्रोताओं के हृदय को ही नहीं छू गया, बल्कि भारतीय अध्यात्म और सनातन संस्कृति के आदर्शों को भी विश्व पटल पर उजागर कर गया।

विवेकानंद ने अपने वक्तव्य में सभी धर्मों की एकता, सहिष्णुता और मानवता के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही विभिन्न आस्थाओं और संस्कृतियों को अपनाकर उन्हें समान सम्मान देता आया है। उनके शब्दों ने न केवल भारत की आध्यात्मिक विरासत को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई, बल्कि यह संदेश भी दिया कि धर्म विभाजन का नहीं, बल्कि मानवता को जोड़ने का माध्यम है। यह भाषण आज भी विश्व इतिहास की अमूल्य धरोहर माना जाता है, जिसने भारत की छवि को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई ऊंचाई प्रदान की।

महत्वपूर्ण घटनाचक्र

1730 - अमृता देवी के नेतृत्व में खेजड़ली गांव के 363 लोगों ने पेड़ों को बचाने के लिए अपना बलिदान दिया था। उनकी याद में 11 सितंबर को 'राष्ट्रीय वन शहीद दिवस' मनाया जाता है।

1893 - स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में हुए विश्व धर्म सम्मेलन में भाषण दिया, जिसमें उन्होंने सभी धर्मों की एकता और सहिष्णुता का संदेश दिया।

1906 - महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ़्रीका में सत्याग्रह आन्दोलन आरंभ किया।

1919 - अमेरिकी नौसेना ने होंडुरास पर आक्रमण किया।

1939 - इराक और सऊदी अरब ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।

1941 - अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन का निर्माण शुरू हुआ।

1948 - मोहम्मद अली जिन्ना, पाकिस्तान के संस्थापक और पहले गवर्नर-जनरल का निधन हुआ।

1951 - इंग्लिश चैनल तैरकर पार करने वाली पहली महिला बनी फ्लोरेंस चैडविक। उन्हें इंग्लैंड से फ्रांस पहुंचने में 16 घंटे और 19 मिनट लगे।

1961 - विश्व वन्यजीव कोष (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) की स्थापना हुई।

1965 - भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने दक्षिण पूर्वी लाहौर के निकट बुर्की शहर पर कब्ज़ा किया।

1968 - एयर फ्रांस का विमान संख्या 1611 नाइस के निकट दुर्घटनाग्रस्त। हादसे में 89 यात्रियों और चालक दल के छह सदस्यों की मौत।

1971 - मिस्र में संविधान को अंगीकार किया गया।

1973 - चिली के राष्ट्रपति साल्वाडोर अलांदे का सैन्य तख्तापलट।

1996 - राष्ट्रमंडल संसदीय संघ में पहली बार एक महिला अध्यक्ष निर्वाचित।

2001 - अल-कायदा ने अमेरिकी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन पर आतंकवादी हमले किए, जिसमें लगभग 3,000 लोग मारे गए थे।

2006 - रोजर फेडर ने लगातार तीसरी बार अमेरिकी ओपन टेनिस टूर्नामेंट का खिताब जीता।

2006 - पेस और डेम की जोड़ी ने अमेरिकी ओपन का युगल खिताब जीता।

2006 - भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश पी.एन. भगवती संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति में चौथी बार पुनर्निर्वाचित।

2006 - प्रख्यात बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने भारतीय नागरिकता की मांग की।

2006 - अमेरिकी अंतरिक्ष यान अटलांटिस अंतरिक्ष के साथ जुड़ा।

2007 - येरूशलम से सटे डेविड शहर में लगभग 2000 साल पुरानी सुरंग का पता लगा।

2009 - नोएडा के निठारी काण्ड के आरोपी मोनिन्दर सिंह पंढेर को इलाहाबाद के उच्च न्यायालय ने 19 मामलों में एक रिपा हलदर मामले में बरी किया।

2009 - उच्चतम न्यायालय ने कांशीराम स्मारक स्थल के निर्माण पर रोक लगाई।

2011- रक्षा वैज्ञानिकों ने बनायी 'ल्यूकोडर्मा' की अचूक हर्बल औषधि।

2009 - 9/11 की घटना के बाद एशियाई लोगों को संदेह की नजर से देखा जा रहा था, लेकिन भारतीय मूल के लोगों के बारे में अमेरिकियों की सोच बिल्कुल बदल गई है। इसका कारण भारतीयों की प्रतिभा और परिश्रम है।

2012 - सोमालिया की सेना के साथ संघर्ष में अल शबाब के 50 आतंकवादी मारे गए।

जन्म

1895 - विनोबा भावे- भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रसिद्ध गांधीवादी नेता।

1901 - आत्माराम रावजी देशपांडे - प्रसिद्ध मराठी साहित्यकार।

1911 - लाला अमरनाथ- अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत की ओर से पहला शतक जमाने वाले क्रिकेटर।

1919 - कन्हैयालाल सेठिया - आधुनिक काल के प्रसिद्ध हिन्दी व राजस्थानी लेखक।

1962 - प्रह्लाद जोशी - भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिज्ञ।

1982 - श्रेया सारन- दक्षिण भारतीय अभिनेत्री।

निधन:

1921 - सुब्रह्मण्य भारती - तमिल भाषा के महान् कवि।

1948 - मुहम्मद अली जिन्ना - ब्रिटिशकालीन भारत के प्रमुख नेता और 'मुस्लिम लीग' के अध्यक्ष।

1964 - मुक्तिबोध गजानन माधव- प्रगतिशील भारतीय कवि।

1968 - बाबा हरभजन सिंह - भारतीय सेना का एक सैनिक।

1973 - नीम करोली बाबा- भारतीय गुरु।

1987 - महादेवी वर्मा- हिन्दी कवयित्री और हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक।

1987 - नरेशचंद्र सिंह - मध्य प्रदेश के भूतपूर्व छठे मुख्यमंत्री।

2020 - स्वामी अग्निवेश - भारत के सामाजिक कार्यकर्ता, सुधारक, राजनेता व आर्य समाजी।

महत्वपूर्ण दिवस

-राष्ट्रीय वन शहीद दिवस</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/174/history-of-11-september-chicago-religious-conference-of-1893-and-swami-vivekananda-s-powerful-speech-know-other-important-events</guid><pubDate>11-Sep-2025 6:02:09 am</pubDate></item><item><title>Recipe : पके केले से बनाएं मालपुए, एकदम रूई जैसे नरम बनेंगे और खाने में लाजवाब, जानें विधि</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/173/recipe-make-malpua-from-ripe-bananas-it-will-be-as-soft-as-cotton-and-delicious-to-eat-know-the-method</link><description>Lifestyle Desk : इंडियन थाली में जब तक मीठा न हो स्वाद अधूरा सा लगता है। अगर आप रोज-रोज बाजार की मिठाई खाना पसंद नहीं करते हैं तो घर में हेल्दी तरीके से कुछ मिठाई तैयार की जा सकती हैं। इसके लिए आपको ज्यादा मेहनत करने की भी जरूरत नहीं है। आप पके हुए केले से आसानी से मालपुए बनाकर खा सकते हैं। कई बार घर में केले ज्यादा आ जाते हैं और बहुत जल्दी गलने लगते हैं। ऐसे में आप पके हुए केले से मालपुआ बनाकर खा सकते हैं। खासबात ये है कि आप इन मालपुआ को अपनी पसंद के हिसाब से बेहद हेल्दी भी बना सकते हैं। आप इसमें मैदा की जगह आटा इस्तेमाल करें और मीठे में चीनी की जगह गुड़ का उपयोग करें। तो चलिए फटाफट से जान लीजिए केले से मालपुए (Banana Malpua) बनाने की रेसिपी।

केले से मालपुए की रेसिपी (Banana Malpua Recipe)
पहला स्टेप- मालपुआ बनाने के लिए 2 पके हुए केले लें और उन्हें अच्छी तरह से मैश कर लें। अब किसी बाउल में मसले हुए केले और उसमें 1 गिलास दूध डाल दें। इसमें आधा कप सूजी और आधा कप गेंहू का आटा मिला दें। अब इसमें थोड़े केसर के धागे, आधा चम्मच इलाइची पाउडर, आधा चम्मच सौंफ का पाउडर, आधा चम्मच साबुत सौंफ, एक चुटकी नमक और 3 चम्मच कंडेंस मिल्क यानि मिल्कमेड मिला दें।

दूसरा स्टेप- अब इन सभी को अच्छी तरह से मिक्स कर लें और स्मूद घोल तैयार कर लें। घोल गाढ़ा लगे तो दूध या पानी मिला सकते हैं। तैयार किए बैटर को करीब 2 घंटे के लिए रख दें। जिससे ये अच्छी तरह से फूल जाए।

तीसरा स्टेप- अब पैन में रिफाइंट या देसी घी डालें और घोल को चम्मच की मदद से गर्म किए गए घी में डालें। मालपुए को हल्का सुनहरा होने तक तलें। ध्यान रखें आपको फ्लेम मीडियम ही रखनी है। सारे मालपुए ऐसे ही एक एक करके सेंक लें।

चौथा स्टेप- एक बर्तन में चाशनी बनाने के लिए एक कप कुटा हुआ गुड़ या गुड़ का पाउडर जिसे शक्कर कहते हैं वो लें और इसमें 2 कप पानी डालकर पतली चाशनी बना लें। इस चाशनी में तले हुए मालपुए डाल दें और 5 मिनट बाद निकाल लें।

तैयार हैं सुपर टेस्टी और हेल्दी केले के मालपुए।

फिलहाल, आप इन्हें कटे हुए बादाम और पिस्ता से सजाकर सर्व करें। मालपुआ को चीनी की चाशनी में भी डालकर बना सकते हैं। ये मालपुए बहुत नरम और रसीले बनेंगे।</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/173/recipe-make-malpua-from-ripe-bananas-it-will-be-as-soft-as-cotton-and-delicious-to-eat-know-the-method</guid><pubDate>10-Sep-2025 2:27:35 pm</pubDate></item><item><title>History 10 September : आज मनाया जाता है ʼविश्व आत्महत्या रोकथाम दिवसʼ.भारत के मशहूर फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप का जन्म..जाने और प्रमुख घटनाएं</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/172/history-10-september-today-is-celebrated-as-world-suicide-prevention-day-india-s-famous-film-director-anurag-kashyap-was-born-know-more-important-events</link><description>History of 10 September; आज देश भर में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस (World Suicide Prevention Day) मनाया जा रहा है. सुसाइड के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए इस दिन की शुरुआत की गई. इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन ने साल 2003 में पहली बार 10 सितंबर के दिन विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाने की शुरुआत की थी. इस इवेंट को वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेंटल हेल्थ और वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन ने स्पॉन्सर किया था.

वैश्विक मंच पर इस पहल को काफी सराहना मिली थी. जिसके बाद अगले साल 2004 में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने औपचारिक रूप से विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस को स्पॉन्सर किया था. तभी से हर साल 10 सितंबर को वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे मनाया जाता है.

इसके अलावा आज ही के दिन सिलाई मशीन का पेटेंट कराया गया था. संयुक्त राज्य अमेरिका में, अमेरिकी आविष्कारक एलियास होवे ने 1846 में लॉकस्टिच सिलाई मशीन का पेटेंट कराया था. हावे के डिजाइन में सुई के नुकीले सिरे पर एक आंख और दूसरा धागा ले जाने के लिए एक शटल था, जबकि उनका आविष्कार आधुनिक सिलाई मशीनों का आधार था. शुरुआत में इसे व्यापक स्वीकृति प्राप्त करने के लिए संघर्ष करना पड़ा. 1851 में इसहाक मेरिट सिंगर ने होवे की सिलाई मशीन के एक बेहतर संस्करण का पेटेंट कराया, जिसका उपयोग करना आसान था. साथ ही इसमें फुट ट्रेडल और क्षैतिज तालिका भी शामिल थी.

आज के दिन 1926 में जर्मनी को मित्र राष्ट्र संघ में शामिल किया गया था. इसके बाद अक्टूबर 1933 में एडॉल्फ हिटलर को जर्मनी का चांसलर नियुक्त किए जाने के लगभग नौ महीने बाद जर्मन सरकार ने राष्ट्र संघ से अपनी वापसी की घोषणा की. बताया जाता है कि इसका मुख्य कारण पश्चिमी शक्तियों द्वारा जर्मनी की सैन्य समानता की मांगों को मानने से इंकार करना था.

मित्र राष्ट्र संघ के सदस्यों में शुरुआत में वर्साय सन्धि पर हस्ताक्षर करने वाले ये देश थे, जिनमें ब्रिटेन, इटली,जापान,चीन,फ्रांस आदि थे. अमेरिका इस राष्ट्र संघ का सदस्य नहीं बन सका था. 1940 में फिनलैण्ड पर आक्रमण के कारण उसे सदस्यता से वंचित कर दिया गया. जापान ने 1933 में और इटली ने 1937 में इसकी सदस्यता त्याग दी. 1938 में संघ के सदस्यों की कुल संख्या 62 तक पहुंच गई थी, लेकिन अप्रैल 1946 में संघ की अन्तिम बैठक के समय यह घटकर 43 रह गई थी. इनमें से 34 राज्यों के प्रतिनिधियों ने ही बैठक में भाग लिया.

देश और दुनिया के इतिहास में 10 सितंबर कई कारणों से महत्वपूर्ण है, जिनमें से ये सभी प्रमुख हैं-

1785: प्रशिया ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किया.

1966: भारतीय संसद ने पंजाब और हरियाणा राज्य के निर्माण पर स्वीकृति प्रदान की.

1972: भारत के जाने-माने फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप का जन्म हुआ.

1973: सेंट्रल लंदन में बम धमाके हुए.

1974 : पश्चिम अफ्रीका में स्थित देश गिनी गणराज्य ने पुर्तगाल से स्वतंत्रता प्राप्त की.

2002: स्विटजरलैंड संयुक्त राष्ट्र में शामिल हुआ.

2008: स्विटजरलैंड की सर्न प्रयोगशाला के लार्ज हेड्रॉन कोलाइडर में सबसे बड़ा वैज्ञानिक प्रयोग शुरू हुआ.

1955: टीवी शो गनस्मोक का प्रसारण CBS पर शुरू हुआ. 1975 में शो समाप्त हुआ, तब तक यह श्रृंखला अमेरिकी टेलीविजन पर सबसे लंबे समय तक चलने वाली पश्चिमी श्रृंखला थी.</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/172/history-10-september-today-is-celebrated-as-world-suicide-prevention-day-india-s-famous-film-director-anurag-kashyap-was-born-know-more-important-events</guid><pubDate>10-Sep-2025 5:52:50 am</pubDate></item><item><title>Healthy Chilla Recipe : नाश्ते में ट्राई करें ये 5 चीला रेसिपी, स्वाद के साथ मिलेगा भरपूर प्रोटीन</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/171/healthy-chilla-recipe-try-these-5-chilla-recipes-for-breakfast-you-will-get-plenty-of-protein-along-with-taste</link><description>लाइफस्टाइल डेस्क ; नाश्ते में चीला खाना बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है। ऐसे में अगर आप हाईप्रोटीन हेल्दी ब्रेकफास्ट के ऑप्शन तलाश कर रहे हैं तो आपको ये 5 तरह के चीला ट्राई करने चाहिए।

Healthy Chilla Recipe: सुबह के नाश्ते को लेकर लोगों का विचार होता है कि कुछ ऐसा खाया जाए को स्वादिष्ट भी हो और हेल्दी भी। ऐसे में आप नाश्ते में एक-दो नहीं बल्कि 5 तरीके से चीला बना सकते हैं। इससे आपको भरपूर प्रोटीन मिलेगा। साथ ही जिन चीजों का आप इस्तेमाल करेंगे उनसे आपको फाइबर, विटामिन भी मिलेंगे। यूं तो घरों में अक्सर बेसन का चीला बनाया जाता है। लेकिन आप इसमें में विविधता ला सकते हैं। साथ ही इन्हें खाने से आपका पेट लंबे समय तक भरा रहेगा। साथ ही आपको वजन घटाने में भी मदद मिलेगी।


रागी चीला
अगर आप नाश्ते में ग्लूटेन फ्री आहार चाहते हैं, तो रागी चीला ट्राई करना चाहिए। यह एक हल्का और पौष्टिक नाश्ता आपको जरूर पसंद आएगा।


सूजी, टमाटर और प्याज चीला
सूजी चीले में स्वाद बढ़ाने के लिए, आप कटे हुए टमाटर और प्याज को बैटर में मिलाकर पका सकते हैं। यह खाने में हल्का रहेगा और पेट लंबे समय तक भरा महसूस होगा।

मूंग दाल चीला
हाई प्रोटीन ब्रेकफास्ट के लिए आप नाश्ते में मूंग दाल का चीला बना सकते हैं। यह आपके पेट को लंबे समय तक भरा हुआ रखता है। साथ ही सेहत के लिए पोष्टिक होता है।

ओट्स चीला
नाश्ते में अगर आप सिंपल ओट्स खाकर बोर हो गए हैं तो आप ओट्स से चीला भी बना सकते हैं। इससे आपको फाइबर और पोषक तत्व मिलेंगे।

बाजरा चीला
ग्लूटेन-फ्री चीला के लिए आप मोती बाजरा या फॉक्सटेल बाजरा आज़माएं। इससे आप झटपट नाश्ता तैयार कर सकते हैं।</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/171/healthy-chilla-recipe-try-these-5-chilla-recipes-for-breakfast-you-will-get-plenty-of-protein-along-with-taste</guid><pubDate>09-Sep-2025 2:43:51 pm</pubDate></item><item><title>History 9 September : आज ही के दिन जन्मे थे कारगिल के हीरो शेरशाह कैप्टन विक्रम बत्रा..जानें और प्रमुख घटनाएं</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/170/history-9-september-kargil-hero-sher-shah-captain-vikram-batra-was-born-on-this-day-know-more-important-events</link><description>09 सितंबर का इतिहास; 'शेरशाह ऑफ कारगिल' के नाम से मशहूर भारतीय थलसेना के जांबाज, कैप्टन विक्रम बत्रा का जन्म आज ही के दिन साल यानी 9 सितंबर 1974 में हुआ था. कैप्टन विक्रम बत्रा मई से जुलाई 1999 में चले कारगिल युद्ध में 19 जून को शामिल हुए थे. कैपटन ने जब इस युद्ध में एंट्री मारी तब कारगिल की चोटी 5140 पर पाकिस्तानी कब्जा कर चुके थे. इसी को छुड़ाने का टास्क बत्रा को दिया गया था. अपनी बहादुरी का सबूत देते हुए कैप्टन इस अहम छोटी को जीत कर वहां तिरंगा लगाने में कामयाब हुए. कैप्टन यहीं नहीं रुके. बाद में जब उनके अधिकारियों ने उन्हें और उनकी टीम को आराम देना चाहा तो विक्रम ने कहा 'ये दिल मांगे मोर' यही कहते हुए विक्रम ने चोटी 4875 पर फतह का फैसला किया. अपनी जान की पहवाह किये बिना विक्रम चल पड़े इस मिशन पर लेकिन पाकिस्तानियों को उनकी आने की खबर लग गई थी. 7 जुलाई 1999 को अपनी आखिरी सांस तक लड़ाई लड़ते हुए कैप्टन ने देश के लिए बलिदान दिया और इतिहास में अमर हो गए. 8 जुलाई की सुबह भारत ने चोटी 4875 पर भारतीय कर तीरंगा फहराया लेकिन विक्रम बत्रा को खो दिया. बत्रा को मरणोपरांत भारत का सर्वोच्च सम्मान 'परमवीर चक्र' से सम्मानित किया गया. कैप्टन विक्रम बत्रा के जीवन पर साल 2021 में एक फिल्म भी बनी थी. जिसमे बत्रा का किरदार सिद्धार्थ मल्होत्रा ने निभाया था. 69वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में कियारा-सिद्धार्थ की फिल्म शेरशाह को स्पेशल जूरी अवॉर्ड दिया गया.

भारत से आगे बढ़कर अब विश्व इतिहास पर एक नजर डालते हैं. आज का दिन तकनीकि क्षेत्र में एक अहम खोज के लिए जाना जाता है. 9 सितंबर 1947 में अमेरिका में पहली बार कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर में बग पाया गया था. बता दें ये बग अमेरिका की हॉवर्ड युनिवेर्सिटी की कम्प्यूटेशन लैबोरेटरी में ऑपरेटर्स ट्रांसमिशन के दौरान मार्क सेकंड कम्प्यूटर में नजर आया था. बाद में इसे आसानी से हटा लिया गया था. बग कम्यूटर प्रोग्रामिंग के समय छूट गई वो गलती है जिससे पूरे प्रोग्राम या सॉफ्टवेयर को नुकसान पहुंचता है.

आज यानी 9 सितंबर साल 1850 को कैलिफ़ोर्निया अमेरिका का 31वां राज्य बना था.बता दें कैलिफोर्निया अमेरिका का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है. यह प्रशांत महासागर के साथ 800 मील (1,290 किलोमीटर) से अधिक तक फैला है और अपने सबसे चौड़े बिंदु पर 365 मील (587 किलोमीटर) चौड़ा है.इसकी राजधानी सैक्रामेंटो है.

देश- दुनिया में 9 सितंबर का इतिहास
फ्रांस के राजा फिलिप चतुर्थ ने 1303 में पोप बोनिफेस अष्टम को
इटली के अनाग्नि शहर में बंधक बनाया.
टुमु किले की लड़ाई में मंगोलियाई सेनाओं ने 1449 में चीन के सम्राट को बंधक बनाया.
माइकल एंजिलियो द्यारा बनाई गई डेविड की मूर्ति को 1504 में लोगों के सामने प्रदर्शित किया गया.
ब्रिटेन के लिचफिल्ड शहर की स्थापना 1553 में की गई.
अमेरिकी संसद कांग्रेस ने 1776 में आधिकारिक तौर पर देश का नाम यूनाइटेट कॉलोनीज़ से बदलकर संयुक्त राज्य अमेरिका किया.
कैलीफोर्निया 1850 में अमेरिका का 31वां राज्य बना.
यूरोपीयीय देश लक्जमबर्ग ने 1867 में स्वतंत्रता हासिल की.
अमेरिका की राजधानी का नामकरण 1791 में राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन के नाम पर वाशिंगटन रखा गया.
यूनाइटिड स्टेट्स की राजधानी का नाम वॉशिंगटन डी.सी. 1791 में आज के दिन ही राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन के नाम पर रखा गया.
कैलीफोर्निया 1850 में अमेरिका का 31वां राज्य बना.</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/170/history-9-september-kargil-hero-sher-shah-captain-vikram-batra-was-born-on-this-day-know-more-important-events</guid><pubDate>09-Sep-2025 6:52:00 am</pubDate></item><item><title>Recipe : बेसन का दानेदार हलवा जिसके सामने मूंगदाल का हलवा भी लगेगा फीका..मिनटों में तैयार..जाने बनाने की विधि</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/169/recipe-gram-flour-pudding-with-grainy-texture-will-make-even-moong-dal-pudding-look-pale-ready-in-minutes-know-the-method-of-making-it</link><description>Lifestyle Desk ; मिठाइयों में हलवा बनाना काफी आसान है। हालांकि मूंगदाल का हलवा और गाजर का हलवा बनाने में काफी समय लगता है, लेकिन बेसन का हलवा फटाफट बनकर तैयार हो जाता है। बेसन का हलवा बनाने के लिए न तो घंटों भूनने की जरूरत पड़ती और न ही इसे लंबे समय तक पकाना पड़ता है। जब भी मीठा खाने का मन करे या घर में मेहमान आएं आप बेसन का हलवा बना सकते हैं। राजस्थानी बेसन का हलवा एकदम दानेदार और टेस्टी बनता है। आपको एक बार इस तरह से बेसन का हलवा बनाकर जरूर खाना चाहिए।

बेसन का दानेदार हलवा कैसे बनाएं
बेसन का हलवा बनाने के लिए सामग्री

हलवा बनाने के लिए बेसन 200 ग्राम, घी 2 चम्मच, दूध 2 चम्मच, चीनी 180 ग्राम, पानी 2.5 गिलास, पीला फूड कलर ऑप्शन है। केसर के धागे, घी 3 बड़े चम्मच, सूजी आधा कप, सजाने के लिए बादाम और पिस्ता और इलायची स्वाद के लिए चाहिए।

बेसन का हलवा बनाने की विधि

पहला स्टेप- सबसे पहले एक बड़ी प्लेट में बेसन लें और उसमें 2 चम्मच देसी घी डालें और दूध डाल दें। अब बेसन को हाथ से मलते हुए अच्छी तरह से मिक्स कर लें। इससे बेसन का हलवा एकदम दानेदार बनेगा। अब बेसन को किसी मोटे छेद वाली छन्नी के छान लें।

दूसरा स्टेप- एक पैन में चीनी और 2 गिलास पानी डालकर चाशनी बनने के लिए रख दें। चाशनी में ही केसर के धागे और फूड कलर मिला दें। अब कड़ाही में घी डालें और उसमें सूजी को हल्का भूने और फिर बेसन मिलाकर दोनों को चलाते हुए भून लें।

तीसरा स्टेप- जब बेसन और सूजी का रंग हल्का लाल सा होने लगे और भुनने की खुशबू आने लगे तो इसमें 2-3 चम्मच दूध डालकर लगातार चलाते हुए भूनते रहें। इससे बेसन का हलवा बहुत ही स्वादिष्ट बनता है।

चौथा स्टेप- अब बेसन और सूजी के मिक्स को चलाते हुए साइड में तैयार की गई चाशनी को धीरे धीरे डालकर मिलाते रहें और लगातार चलाते भी रहें। सारा चीनी वाला घोल बेसन में डालकर मिलाएं और गाढ़ा होने तक पकाएं। ऊपर से 2-3 बड़े चम्मच घी और डालें। इलायची पाउडर डालें और कटे हुए मेवा डालकर गर्मागरम हलवा सर्व करें।

पांचवां स्टेप- एक बार इस तरह बेसन का बना हलवा खाएंगे तो फिर मूंगदाल का हलवा भी पसंद नहीं आएगा। ये हलवा खाने में सुपर टेस्टी और दानेदार बनता है। मेहमान भी पता नहीं लगा पाएंगे कि ये बेसन का हलवा बना है।</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/169/recipe-gram-flour-pudding-with-grainy-texture-will-make-even-moong-dal-pudding-look-pale-ready-in-minutes-know-the-method-of-making-it</guid><pubDate>08-Sep-2025 12:50:53 pm</pubDate></item><item><title>History 8 September : आज पूरा विश्व मना रहा है ʼअंतराष्ट्रीय साक्षरता दिवसʼ.भारत की पूर्व PM इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी का निधन</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/168/history-8-september-today-the-whole-world-is-celebrating-international-literacy-day-former-indian-pm-indira-gandhi-s-husband-feroze-gandhi-passed-away</link><description>On This Day in History 8 September: एक सभ्य घर जैसा कोई विद्यालय नहीं है और एक भद्र अभिभावक जैसा कोई अध्यापक नहीं है - महात्मा गांधी के इन सुन्दर वचनों से शुरू करते हैं आज का इतिहास... आज विश्व भर में अंतराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जा रहा है. जहां तक इसके इतिहास की बात है तो साल 1965 में यूनेस्को ने इसे विश्वभर में मनाये जाने का प्रस्ताव दिया था. इसका उद्देश्य हर व्यक्ति को शिक्षा के प्रति जागरूक करना था. 8 सितंबर साल 1966 में पहली बार अंतराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया गया.

आज का दिन अमेरिकी इतिहास में एक दिलचस्प किस्से के लिए याद की जाती है. आज यानी 8 सितंबर साल 1974 को तब के अमेरिकी राष्ट्रपति गेराल्ड आर फोर्ड ने प्रोक्लेमेशन 4331 जारी किया था. ये वही विवादित प्रोक्लेमेशन था जिसके तहत पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन को आपराधिक मामलों में संलिप्त होने के बावजूद माफ़ी दी गई थी. निस्कन ने उसी साल अगस्त में राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया था. बता दें निक्सन इकलौते अमेरिकी राष्ट्रपति हैं जिन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था. निक्सन की 'वाटरगेट स्कैंडल' में भूमिका को देखते हुए इनपर महाभियोग चलाया गया था. इतिहास के कई जानकारों के मुताबिक ये माफ़ी भी विवादित थी. जिसकी कीमत 2 साल बाद फोर्ड को चुकानी पड़ी और वो आगामी चुनाव हार गए.

8 सितंबर 1960 ये वो दिन है जब फिरोज गांधी ने अस्पताल में आखिरी साँसे ली थी. 7 सितंबर 1960 को फिरोज गांधी को दिल का दौरा पड़ा था जिसके बाद उन्हें अस्पताल में एडमिट कराया गया. 8 तारीख की सुबह 7 बजकर 45 मिनट पर फिरोज गांधी ने आखिरी सांस ली. उनके आखिरी समय में इंदिरा गांधी उनके साथ मौजूद थी. बीबीसी की एक रिपोर्ट में बर्टिल फाक की किताब फ़िरोज़- द फॉरगॉटेन गांधी के हवाले से कहा गया था, उनके शव को तीन मूर्ति भवन में रखा गया था. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि उस समय वहां सभी धर्मग्रंथों का पाठ किया जा रहा था. इसके बाद उनका हिन्दू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया गया था. उस वक्त राजीव गांधी 16 साल के थे और उन्हें फिरोज़ गांधी के शव की चिता को मुखाग्नि दी गई थी. उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीतिरिवाजों से किया गया. ऐसा कहा जाता है कि उन्हें पारसी तरीके से अपना अंतिम संस्कार करवाना पसंद नहीं था.

देश-दुनिया में आज का इतिहास

1926 : महान संगीतकार एवं गायक भूपेन हज़ारिका का जन्म.
1943 : द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान इटली ने मित्र सेना के साथ बिना शर्त युद्धविराम संधि पर हस्ताक्षर किए.
1960 : भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी का निधन.
1962 : चीन ने भारत की पूर्वी सीमा में घुसपैठ की.
1966 : लोगों को पढ़ाई के प्रति जागरूक करने के लिए यूनेस्को ने साक्षरता दिवस मनाने की शुरुआत की.
1988 : जाने-माने व्यवसायी विजयपत सिंघानिया अपने माइक्रो लाइट सिंगल इंजन एयरक्राफ्ट से लंदन से अहमदाबाद पहुंचे.
2002 : नेपाल में माओवादियों ने 119 पुलिसकर्मियों को मार डाला.
2008 : अमेरिकी पत्रिका फोर्ब्स ने भारतीय अरब पति लक्ष्मी मित्तल को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित करने की घोषणा की.
2019 : प्रख्यात न्यायविद्, कानून के ज्ञाता एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री राम जेठमलानी का निधन.
2020: हिंदुजा समूह की प्रमुख कंपनी अशोक लीलैंड के मानद चेयरमैन आर. जे.साहनी का निधन.
2020: तेलुगु रंगमंच एवं फिल्मों के जाने-माने अभिनेता जयप्रकाश रेड्डी का निधन.</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/168/history-8-september-today-the-whole-world-is-celebrating-international-literacy-day-former-indian-pm-indira-gandhi-s-husband-feroze-gandhi-passed-away</guid><pubDate>08-Sep-2025 5:09:09 am</pubDate></item><item><title>Boondi Raita Recipe : दही, बूंदी और मसालों का कमाल.! जाने रीवा का वो देसी रायता रेसिपी, जिसे खाकर कहेंगे - वाह मजा आ गया</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/167/boondi-raita-recipe-the-magic-of-curd-boondi-and-spices-know-that-desi-raita-recipe-of-rewa-after-eating-which-you-will-say-wow-it-was-so-delicious</link><description>Boondi Raita Recipe: बारिश के मौसम रीवा में लजीज व्यंजन बनना आम बात है, लेकिन इन पकवनों के साथ बनने वाला रीवा का देसी ताजे दही का ठंडा-ठंडा रायता खाने का मजा ही कुछ और होता है, जब बात हो रायते की, तो बूंदी रायता हर किसी की पसंद बन जाता है. यह एक आसान, झटपट बनने वाली और बहुत ही स्वादिष्ट डिश है जो किसी भी खाने के स्वाद को दोगुना कर देती है. मसालेदार दही में भीगी हुई मुलायम बूंदी, ऊपर से धनिया या पुदीने की ताजगी, हर एक चम्मच में ठंडक और स्वाद का अनोखा अनुभव मिलता है. चाहे आप इसे बिरयानी, पुलाव या पराठों के साथ परोसें, यह हर बार वाहवाही बटोरता है. ऐसे में आज हम आपको बता रहे हैं घर पर आसान तरीके से बूंदी रायता बनाने की रेसिपी.

सामग्री
1/2 कप बूंदी  सादी या नमकीन
1 कप दही  ताजा
1/4 से 1/2 छोटी चम्मच चाट मसाला
1/2 छोटी चम्मच सौंफ पाउडर  ऑप्शनल
1/2 छोटी चम्मच भुना हुआ जीरा पाउडर
1/4 छोटी चम्मच लाल मिर्च पाउडर या कयेन पेपर
1/4 छोटी चम्मच काली मिर्च पाउडर  ऑप्शनल
1 से 2 बड़े चम्मच बारीक कटी धनिया पत्ती या 1 बड़ा चम्मच पुदीना पत्ती
स्वाद अनुसार काला नमक, सेंधा नमक.

विधि
सबसे पहले दही तैयार कर लें. एक बाउल में ताजा दही लें और उसे अच्छे से फेंट लें ताकि वह एकदम चिकनी और मुलायम हो जाए. खट्टा दही इस्तेमाल न करें, और कोशिश करें कि घर का ताजा दही हो. बूंदी को फेंटी हुई दही में डालें और एक चम्मच की मदद से धीरे-धीरे मिलाएं, सबकुछ अच्छे से मिक्स हो जाए, दस से पंद्रह मिनट के लिए ढककर रख दें. अब इसमें स्वाद के अनुसार मसाले मिलाएं. इसमें आप चम्मच चाट मसाला.भुना हुआ जीरा पाउडर, लाल मिर्च पाउडर. काली मिर्च पाउडर (अगर चाहें तो).सौंफ पाउडर भी डाल सकते हैं. (ऑप्शनल है). साथ ही स्वाद अनुसार काला नमक, सफेद नमक या सेंधा नमक भी मिलाएं. अब इन सभी मसालों को अच्छी तरह दही और बूंदी में मिला दें और स्वाद चखकर जरूरत हो तो थोड़ा और मसाला या नमक डाल लें.लास्ट में, ऊपर से धनिया पत्ती या पुदीना पत्ती डालें. आप चाहें तो दोनों को भी मिक्स कर सकते हैं.

अब आपका बूंदी रायता तैयार है. यह रायता बिरयानी, पुलाव, जीरा राइस, केसर राइस या स्टफ्ड पराठों जैसे आलू पराठा, गोभी पराठा या मूली पराठा के साथ बहुत स्वादिष्ट लगता है.आप चाहे तो सबसे पहले ही 1.5 कप पानी गर्म करें और उसे बाउल में डालकर उसमें बूंदी भिगो दें. ढककर 9 से 12 मिनट तक भिंगोएं. ध्यान रखें, ज्यादा देर भिगोने से बूंदी चिपचिपी हो सकती है, या मेश हो सकती है ऐसे में दही में बूंदी को फूलाना नहीं पड़गा मसाले मिलाकर परोस सकती हैं. लेकिन दही में फूली बूंदी रायता का स्वाद ज्यादा अच्छा होता है.</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/167/boondi-raita-recipe-the-magic-of-curd-boondi-and-spices-know-that-desi-raita-recipe-of-rewa-after-eating-which-you-will-say-wow-it-was-so-delicious</guid><pubDate>07-Sep-2025 2:13:42 pm</pubDate></item><item><title>History 7 September : चंद्रयान-2 की विफलता ने ही लिखी थी चंद्रयान-3 के सफलता की कहानी..जाने और प्रमुख घटनाएं</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/166/history-7-september-the-failure-of-chandrayaan-2-wrote-the-story-of-chandrayaan-3-s-success-know-more-important-events</link><description>Today History : 7 सितंबर 2019, ये वो तारीख है (Aaj ka itihas) जिसने सवा सौ करोड़ भारतियों का दिल तोड़ दिया था. ये वही दिन था जब इसरो का चंद्र मिशन चंद्रयान -2 लैंडिंग (Chandrayaan-2 landing day) के वक्त दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. टीवी पर टकटकी लगाए बैठे लोग अचानक निराशा के सागर में डूब गए थे. इसरो (ISRO) कॉम्प्लेक्स में सन्नाटा पसर गया. तब के इसरो चीफ के शिवान (ISRO ex Chief K Sivan) फूट-फूट कर रोने लगे. उन्हें सांत्वना देने के लिए PM मोदी खुद आगे आए. लेकिन कहते हैं हर फेलियर हमें हजारों सीख दे जाता है. चंद्रयान-2 की असफलता ने ही चंद्रयान-3 की सफलता के रास्ते खोले थे. चंद्रयान-2 से सीख लेकर ही चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त 2023 की शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट (Soft on the Moon's South Pole) लैंडिंग की.

चंद्रयान से हटकर आइये बात करते हैं अब भारत एक ऐसे बैंक की, जिसे शुरू तो निजी स्वामित्व पर किया गया था. लेकिन आगे चलकर इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया. जी हां हम बात कर रहे हैं बैंक ऑफ़ इंडिया की जिसकी स्थापना (Establishment of Bank of India) आज ही के दिन साल 1907 में मुंबई में कुछ प्रतिष्ठित व्यापारियों के समूह द्वारा की गई थी. बाद में जब इंदिरा सरकार ने जुलाई 1969 में 13 राष्ट्रीय बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया तो बैंक ऑफ इंडिया भी उसमें शामिल था.विश्व

इतिहास में देखे तो पाएंगे आज यानी 7 सितंबर का दिन प्रद्योगिकी और तकनिकी के लिहाज़ से भी अहम है. आज ही के दिन साल 1927 में पहला पूर्णतः इलेक्ट्रॉनिक टेलीविजन बनाया गया (first fully electronic television created) था. इस टीवी को बनाने का श्रेय फिलियो टेलर को दिया जाता है. वहीं, अगर बात दुनिया के पहली टेलीविजन की करें, तो उसे साल 1925 में बनाया गया था लेकिन ये एक मकैनिकल टेलीविजन था जिसे John Logie Baird ने बनाया था.

देश- दुनिया में 7 सितंबर का इतिहास

1812: नेपोलियन ने रूसी सेना को हराया.
1822: ब्राजील ने पुर्तगाल से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की.
1921: मिस अमेरिका प्रतियोगिता की शुरुआत की गई.
1923 : विएना में इंटरपोल की स्थापना.
1927: फिलियो टेलर ने पूर्णतः इलेक्ट्रॉनिक टीवी बनाने में सफलता हासिल की.
1931: लंदन में गोलमेज सम्मेलन का दूसरा सत्र शुरू.
1940: दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी ने अपनी वायुसेना के जरिए ब्रिटेन के शहरों पर बमबारी शुरू की.
1963 : अशोक चक्र विजेता विमान परिचारिका नीरजा भनोट का जन्म। नीरजा ने एक अपहृत विमान के यात्रियों को बचाने के दौरान अपनी जान गंवा दी थी.
1986 : बिशप डेसमंड टूटू केपटाउन के पहले अश्वेत आर्कबिशप बने.
2008 : भारत-अमेरिका परमाणु करार के तहत एनएसजी के 45 सदस्यों ने भारत को अन्तरराष्ट्रीय बिरादरी से परमाणु व्यापार की छूट दी.
2009 : भारत के पंकज आडवाणी ने विश्व पेशेवर बिलियडर्स का ख़िताब जीता.
2011 : दिल्ली उच्च न्यायालय के गेट नंबर पांच के बाहर बम विस्फोट में 17 लोगों की मौत, 76 अन्य घायल.</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/166/history-7-september-the-failure-of-chandrayaan-2-wrote-the-story-of-chandrayaan-3-s-success-know-more-important-events</guid><pubDate>07-Sep-2025 7:11:17 am</pubDate></item><item><title>Recipe : परवल की मिठाई कैसे बनाते हैं, इसमें क्या चीज भरी जाती है, नोट कर लें सबसे आसान विधि परवल की मिठाई रेसिपी</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/165/recipe-how-to-make-parwal-mithai-what-is-stuffed-in-it-note-down-the-easiest-method-parwal-mithai-recipe</link><description>लाइफस्टाइल डेस्क ; परवल की सब्जी तो लोग खूब खाते हैं लेकिन परवल की मिठाई लोगों ने कम ही खाई है। जहीं हा परवल से बहुत स्वादिष्ट मिठाई बनती है। हरे रंग की ये दिखने में जितनी सुंदर लगती है खाने में उससे कहीं ज्यादा टेस्टी लगती है। यूपी बिहार में परवल की मिठाई लोग स्वाद लेकर खाते हैं। खासतौर से बिहार में परवल की मिठाई काफी बनती है। चूंकि परवल अपने आप में पौष्टिक तत्वों से भरपूर सब्जी है तो सोचिए इसकी मिठाई भी हेल्दी ही होगी। आप इसे घर पर आसानी से बना सकते हैं। तो चलिए बिना देरी किए फटाफट से जान लें परवल की मिठाई बनाने की ये आसान रेसिपी।

परवल की मिठाई बनाने की रेसिपी
पहला स्टेप- आपको इसके लिए 7-8 पहले मीडियम साइज के परवल लेने होंगे। परवल को धोकर अच्छी तरह छील लें, जिससे कड़ा छिलका निकल जाए। अब बीच से एक कट लंबाई में लगाएं और परवल के अंदर के बीज निकाल लें। एक पैन में पानी को उबलने के लिए रख दें और उसमें परवल डाल दें। आप चाहें तो सिर्फ कट लगाकर ही परवल को उबाल सकते हैं। उबलने के बाद आसानी से बीज निकाल सकते हैं। परवल का रंग हरा ही बना रहे इसके लिए पानी में 1 चम्मच चीनी और आधा टी स्पून सोडा डाल दें। परवल करीब 5-7 मिनट में उबल जाएंगे और उन्हें निकालकर किसी छन्नी पर रख दें जिससे पानी निकल जाए। अब एक बाउल में ठंडा बर्फ वाला पानी लें और उसमें उबले हुए परवल डालकर रख दें।

दूसरा स्टेप- एक पैन में करीब आधा कप चीनी लें और उसमें आधा कप से थोड़ा ज्यादा पानी मिलाकर चाशनी बना लें। चाशनी में पिसी इलाइची पाउडर डालें और हल्की गाढ़ी चाशनी बनने पर परवल डाल दें। परवल को चाशनी में डालकर 3-4 मिनट के लिए पका लें ताकि अंदर तक चाशनी चली जाए।

तीसरा स्टेप- अब स्टफिंग के लिए 200 ग्राम मावा घर में बना लें या खरीदकर ले आएं। मावा में स्वादानुसार चीनी, ड्राई फ्रूट्स और इलाइची मिला दें। परवल के अंदर मावा की स्टफिंग करें और ऊपर से पिसा हुआ नारियल का बुरादा डाल दें। सजाने के लिए ऊपर से कटी हुई चेरी और चांदी की वर्क लगाएं और फ्रिज में रख दें। तैयार है स्वादिष्ट और ठंडी-ठंडी परवल की मिठाई।</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/165/recipe-how-to-make-parwal-mithai-what-is-stuffed-in-it-note-down-the-easiest-method-parwal-mithai-recipe</guid><pubDate>06-Sep-2025 2:21:11 pm</pubDate></item><item><title>History of 06 September : नेताजी के आदर्श शरतचंद्र बोस का जन्मदिन..समलैंगिकता को मिली थी सहमति..जाने और प्रमुख घटनाएं</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/164/history-of-06-september-birthday-of-netaji-s-idol-sharat-chandra-bose-homosexuality-got-consent-know-more-important-events</link><description>On This Day in History 6 September: 6 सितंबर का दिन (6 september ka itihas) भारत और विश्व इतिहास (aaj ka itihas) की नजरों से देखें तो काफी अहम है.आज ही के दिन 6 सितंबर 1889 को शरतचंद्र बोस का जन्म हुआ था. दरअसल शरतचंद्र बोस (Sarat chandra Bose), नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बड़े भाई थे. ऐसा कहा जाता है कि जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) को अंग्रेजों ने उनके घर पर नजरबन्द कर दिया था उस समय वो शरतचंद्र ही थे जिन्होंने चक्रव्यूह को भेदने की पूरी कला शिशिर बोस (Sisir Bose) को सिखाई थी. इस घटना को भारतीय इतिहास में 'दी ग्रेट एस्केप' ('The Great Escape') के नाम से जाना जाता है. शरतचंद्र से नेताजी का एक और किस्सा जुड़ा हुआ है जब साल 1921 में सुभाषचन्द्र बोस ने सिविल सेवा पद से इस्तीफा दिया था उस समय उन्होने शरत चंद्र को खत लिख कर माफ़ी मांगी थी. इस खत में लिखा था मुझे आपके आदर्शों पर भरोसा है. मेरा फैसला आखिरी है और ये अटल है लेकिन मेरा मौजूदा कदम आपके हाथ में है. क्या आप मुझे नए और हिम्मत से भरे रास्ते को चुनने के लिए शुभकामनाएं नहीं देंगे?

6 सितंबर का दिन भारतीय न्याय व्यवस्था के लिए भी अहम फैसले का दिन था. आज ही के दिन यानी 6 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर (decriminalize homosexuality) कर दिया. उस समय मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा (former Chief Justice Deepak Mishra) की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने एकमत से फैसला सुनाया था. इस ऐतिहासिक मामले पर फैसला सुनाते वक़्त पीठ ने कहा था कि 'परस्पर सहमति से वयस्कों के बीच समलैंगिक यौन संबंध अपराध नहीं हैं और ऐसे यौन संबंधों को अपराध के दायरे में रखने की धारा 377 के प्रावधान से संविधान से मिले समता और गरिमा के अधिकार का हनन होता है.'

जब कभी भी फिल्म जगत के बड़े चेहरों का नाम लिया जाएगा जापान के फिल्म निदेशक अकीरा कुरासोवा (Akira Kurasova death anniversary) का नाम बड़े अदब और सम्मान के साथ लिया जाता है. 1943 से अपनी पहली फ़िल्म 'सांसिरो सुगाता' से अपने करियर की शुरुआत करने वाले कुरासोवा को शायद तब ये बात नहीं पता होगी कि एक वक़्त के बाद उनकी निर्देशन और स्क्रीन राइटर की कला को दुनिया इस तरह सराहेगी. द सेवन समुराई, राशोमोन और ब्लड ऑन द थ्रोन अकीरा की आल टाइम क्लासिक कल्ट शाबित हुई थी. आज ही वो दिन हैं जब साल 1998 में दुनिया के इस महान निर्देशक ने आखिरी साँसे ली थी.

देश-दुनिया में 6 सितंबर का इतिहास
1522 : समंदर के रास्तेू पृथ्वीच का पूरा चक्कवर लगाने वाला पहला जहाज विक्टो:रिया स्पेसन लौटा.

1657 : मुगल शासक शाहजहां के अचानक बीमार पड़ने से उनके राज्य में कई जगह अलगाववादी आंदोलन शुरू हो गए.

1889 : शरत् चंद्र बोस का जन्म.

1901 : अमेरिका के 25वें राष्ट्रपति विलियम मैककिनले को न्यूयॉर्क में एक व्यक्ति ने गोली मारी. आठ दिन तक जीवन-मृत्यु के बीच संघर्ष करने के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया.

1929 : जाने-माने भारतीय फिल्मकार यश जौहर का जन्म अविभाजित भारत के लाहौर में हुआ.

1970 : पॉपुलर फ्रंट फॉर द लिबरेशन ऑफ फलस्तीन ने यूरोप के हवाई अड्डों से चार विमानों का अपहरण किया. अपहरणकर्ता इन विमानों को जॉर्डन और मिस्र के हवाईअड्डों पर ले गए. बंधक बनाए गए 382 यात्रियों के बदले में उन्होंने स्विस जेल में बंद तीन लोगों को छोड़ने की मांग की.

1972 : हिंदुस्तांनी शास्त्री य संगीत के दिग्गमज एवं प्रसिद्ध सरोद वादक उस्तानद अलाउद्दीन खान का निधन.

1990 : संसद से पारित हुआ प्रसार भारती विधेयक.

1991 : रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर को कभी सेंट पीटर्सबर्ग, कभी पेत्रोग्राद तो कभी लेनिनग्राद नाम से पुकारे जाने के बाद उसका पुराना नाम सेंट पीटर्सबर्ग वापस मिला.

1997 : एक हफ़्ते तक शोक मनाने के बाद वेल्स की राजकुमारी डायना को ब्रिटेन और दुनिया ने अंतिम विदाई दी.

1998 : मशहूर जापानी फिल्मत निर्देशक अकीरा कुरासोवा का निधन.
2008 : भारत और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह ने मंजूरी दी.

2018 : उच्चतम न्यायालय ने परस्पर सहमति से वयस्कों के बीच समलैंगिक यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया और इससे जुड़े ब्रिटिश काल के कानून को समानता के अधिकार का उल्लंघन बताया.

2020: संविधान के मूल ढांचे का सिद्धांत दिलाने वाले केशवानंद भारती का निधन. भारती ने केरल भूमि सुधार कानून को चुनौती दी थी जिसपर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने संविधान के मूल ढांचे का सिद्धांत दिया .</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/164/history-of-06-september-birthday-of-netaji-s-idol-sharat-chandra-bose-homosexuality-got-consent-know-more-important-events</guid><pubDate>06-Sep-2025 6:21:59 am</pubDate></item><item><title>Recipe : टेस्ट से लेकर हेल्थ तक क्रिस्पी राइस डोसा, जो फिट होता है हर मील में, जानिए कैसे बनाएं</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/163/recipe-from-taste-to-health-crispy-rice-dosa-which-fits-in-every-meal-know-how-to-make-it</link><description>Lifestyle Desk : टेस्ट के साथ-साथ हेल्थ के लिए बेस्ट ऑप्शन राइस डोसा है. यह डोसा खासतौर पर चावल और उड़द दाल से बनाया जाता है. यह बाहर से क्रिस्पी और अंदर से सॉफ्ट होता है.
टेस्ट से लेकर हेल्थ तक क्रिस्पी राइस डोसा, जो फिट होता है हर मील में जानिए कैसे बनाएं
राइस डोसा रेसिपी

डोसा एक ऐसी डिश है जो नाश्ते से लेकर लंच या डिनर में भी उतने ही चाव से खाई जाती है. यह हल्की, कुरकुरी और पेट भरने वाली डिश न सिर्फ टेस्ट में कमाल होती है, बल्कि सेहत के लिए भी अच्छी मानी जाती है. खास बात यह है कि इसे बनाना बहुत आसान है और इसमें ज्यादा तेल-घी की जरूरत भी नहीं पड़ती. यह टेस्ट के साथ-साथ हेल्थ के लिए बेस्ट ऑप्शन राइस डोसा है.

यह डोसा खासतौर पर चावल और उड़द दाल से बनाया जाता है. बाहर से क्रिस्पी और अंदर से सॉफ्ट यह डोसा नारियल की चटनी और गरमा-गरम सांभर के साथ जब इसे परोसा जाता है, तो इसका टेस्ट दोगुना हो जाता है. तो आइए जानते हैं कि क्रिस्पी राइस डोसा घर पर कैसे बनाया जा सकता है.

क्रिस्पी राइस डोसा बनाने की रेसिपी

1. घर पर क्रिस्पी राइस डोसा बनाने के लिए चावल और उड़द दाल को साफ पानी में अच्छे से धो लें. 2-3 बार धोने से उनका गंद और एक्स्ट्रा स्टार्च निकल जाता है.

2. अब दोनों को अलग-अलग बर्तन में कम से कम 5-6 घंटे के लिए भिगो दें. अगर आप चाहें तो थोड़ा-सा मेथी दाना भी उड़द दाल में भिगो सकते हैं, इससे डोसा और भी क्रिस्पी बनता है और फर्मेंटेशन अच्छा होता है.

3. जब चावल और दाल अच्छे से फूल जाए, तब उन्हें मिक्सी या ग्राइंडर में अलग-अलग पीस लें. ध्यान रखें कि बैटर न तो बहुत गाढ़ा हो और न ही बहुत पतला हो. चिकना और बहने लायक होना चाहिए.

4. अब दोनों घोल को एक बड़े बर्तन में मिलाएं और उसे ढककर गर्म जगह पर रातभर या कम से कम 8 घंटे के लिए रख दें. इस दौरान घोल हल्का फूल जाएगा और उसमें हल्की खटास आ जाएगी.

5. इसके बाद फॉर्मेट हो चुके बैटर में अब स्वादानुसार नमक मिला लें. अब आपका डोसा बैटर तैयार है.

6. अब डोसा सेंकने के लिए नॉन-स्टिक तवा या कास्ट आयरन तवा लें और उसे मीडियम आंच पर गरम करें. तवे को थोड़ा सा तेल लगाकर कपड़े से साफ कर लें ताकि डोसा चिपके नहीं.

7. इसके बाद चम्मच बैटर लें और तवे के बीच में डालें, फिर उसे गोल-गोल फैलाते हुए पतला कर दें. कोशिश करें कि डोसा एकसार फैले ताकि वो हर जगह से क्रिस्पी हो.

8. डोसे के किनारों पर थोड़ा सा तेल या घी डालें. इससे वो और कुरकुरा बनता है. डोसा जब नीचे से सुनहरा और ऊपर से पक जाए, तो उसे मोड़कर प्लेट में निकाल लें. अगर आप चाहें तो इसे पलटने की जरूरत नहीं है सिर्फ एक तरफ से सेंकना काफी होता है. और इसी तरह बाकी बैटर से सारे डोसे तैयार कर लें.

9. राइस डोसे को आप नारियल की चटनी, टमाटर की चटनी और गर्म गर्म सांभर के साथ परोस सकते हैं. कुछ लोग आलू की मसाले वाली स्टफिंग डालकर इसे मसाला डोसा भी बना लेते हैं.</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/163/recipe-from-taste-to-health-crispy-rice-dosa-which-fits-in-every-meal-know-how-to-make-it</guid><pubDate>05-Sep-2025 2:31:26 pm</pubDate></item><item><title>05 September History : शिक्षक दिवस के अलावा और भी कई ऐतिहासिक घटनाएं अपने अंदर समेटे हुए है 5 सितंबर</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/162/05-september-history-apart-from-teacher-s-day-5-september-also-contains-many-other-historical-events</link><description>Teachers Day 2022: भारत आज देश के दूसरे राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन की याद में शिक्षक दिवस मना रहा है. शिक्षक दिवस के अलावा 5 सितंबर के दिन और भी कई ऐतिहासिक घटनाएं हो चुकी हैं.

Teachers Day: आज 5 सितंबर है. भारत में इस दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है. इसके शिक्षक दिवस के रूप में मनाए जाने की वजह भी खास है. 5 सितंबर को देश के दूसरे राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म हुआ था और उन्हीं के सम्मान में इस दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है.

5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु में पैदा हुए डॉ राधाकृष्णन को भारतीय संस्कृति के संवाहक, प्रख्यात शिक्षाविद् और महान दार्शनिक के रूप में जाना जाता है. डॉ राधाकृष्णन को देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न भी मिल चुका है. वहीं शिक्षक दिवस से अलग इस दिन के इतिहास की बात करें तो आपको और भी बहुत कुछ मिलेगा. देश-दुनिया के इतिहास में 5 सितंबर की तारीख में दर्ज अन्य महत्वपूर्ण घटनाएं कुछ इस प्रकार हैं.



1698 : 5 सितंबर को ही इंग्लैंड में एक प्रतिद्वंद्वी ईस्ट इंडिया कंपनी खोली गई.

1763 : मीर कासिम को राजमहल के निकट उदयनाला में ब्रिटिश फौजों के खिलाफ युद्ध में हार स्वीकार करनी पड़ी.

1914 : ब्रिटेन, फ्रांस, बेल्जियम और रूस के बीच लंदन समझौता.

1986 : आतंकवादियों द्वारा अपह्रत भारतीय विमान के यात्रियों को बचाने के लिए फ्लाइट अटेंडेंट नीरजा भनोट ने अपनी जान दी.

1991 : नेल्सन मंडेला अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए.

2009 : नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने 10 कंपनियों पर शेयर बाज़ार में कारोबार करने पर प्रतिबंध लगाया.

2011 : भारतीय बैंक संघ और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम द्वारा तैयार एटीएम के जरिए चेक निर्गम (क्लियर) करने की तकनीकी प्रणाली को अंतिम रूप दिया गया.

2014 : विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अनुमान के मुताबिक, गिनी, लाइबेरिया, नाइजीरिया, सेनेगल और सिएरा लियोन में इबोला वायरस से संक्रमित 3500 लोगों में से 1900 लोगों की मौत.</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/162/05-september-history-apart-from-teacher-s-day-5-september-also-contains-many-other-historical-events</guid><pubDate>05-Sep-2025 6:16:21 am</pubDate></item><item><title>Lauki Chilla Recipe : सुबह के नाश्ते में ट्राई करें लौकी का चीला..स्वाद में डोसे को देगा टक्कर..जाने बनाने की विधि</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/161/lauki-chilla-recipe-try-lauki-chilla-for-breakfast-it-will-give-tough-competition-to-dosa-in-taste-know-the-recipe</link><description>Lauki Chilla Recipe: सुबह के नाश्ते में ट्राई करें लौकी का चीला, स्वाद में डोसे को देगा टक्कर
सुबह के नाश्ते में आप आसानी से लौकी का चीला बना सकते हैं। इसे बनाना काफी आसान है। इसे खाने से पूरे दिन शरीर में ऊर्जा बनी रहती है।

आज के समय लोग नाश्ते में कुछ हेल्दी खाना चाहते हैं, लेकिन समय की कमी के कारण कई लोग इसे स्किप कर देते हैं। दरअसल, सुबह का नाश्ता दिन की शुरुआत का सबसे अहम मील माना जाता है। अगर आप अपने दिन की शुरुआत हेल्दी नाश्ते से करते हैं, तो पूरे दिन आपकी बॉडी में एनर्जी बनी रहती है।

अक्सर लोग भागदौड़ और समय की कमी के कारण नाश्ता छोड़ देते हैं। ऐसे में हम आपके लिए एक ऐसा हेल्दी और क्विक नाश्ता लेकर आए हैं, जिसे आप कम समय में आसानी से बना सकते हैं। इस लेख में हम आपको लौकी का चीला बनाने का आसान तरीका बताएंगे, जिसे आप बिना किसी परेशानी के तैयार भी कर सकते हैं।

लौकी का चीला बनाने की सामग्री
500-700 ग्राम लौकी
250 ग्राम गाजर
250 ग्राम पालक
2 बड़ा प्याज
अदरक
हरी मिर्च
5 लहसुन की कलियां
आधा कप आटा
आधा कप बेसन
नमक
दो चम्मच घी

लौकी का चीला कैसे बनाएं?
लौकी का चीला बनाने के लिए सबसे पहले एक लौकी लेकर उसे कद्दूकस कर लें और हल्का सा नमक मिलाकर थोड़ी देर के लिए एक थाली में रख दें। इसके बाद अदरक और हरी मिर्च का पेस्ट तैयार कर लें। अब एक बड़े बाउल में कद्दूकस की हुई लौकी, बारीक कटी पालक, गाजर, प्याज, आटा और बेसन डालकर अच्छे से मिक्स करें। फिर इसमें नमक डालकर एक बैटर तैयार करें।


चीला बनाने के लिए तवा गरम करें और उस पर हल्का तेल या घी डालें। अब इस पर लौकी का बैटर फैलाएं और धीमी आंच पर पकने दें। कुछ समय बाद यह क्रिस्पी और सुनहरा हो जाएगा। फिर इसे पलटकर दूसरी ओर भी सेक लें। इस तरह स्वादिष्ट और हेल्दी लौकी का चीला तैयार हो जाएगा। आप इसे दही या अपनी पसंद की चटनी के साथ परोस सकते हैं।</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/161/lauki-chilla-recipe-try-lauki-chilla-for-breakfast-it-will-give-tough-competition-to-dosa-in-taste-know-the-recipe</guid><pubDate>04-Sep-2025 1:40:08 pm</pubDate></item><item><title>History 4 September : आज ही के दिन हुई थी GOOGLE की शुरुआत..मशहूर अभिनेता ऋषि कपूर का जन्म..जाने और प्रमुख घटनाएं</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/160/history-4-september-google-was-started-on-this-day-famous-actor-rishi-kapoor-was-born-know-more-important-events</link><description>On This Day in History 4 September: आप जो बात-बात पर अपने फ़ोन में गूगल (search engine) पर सर्च करते हैं न क्या आप जानते हैं दुनिया में गूगल आया कैसे? तो चलिए बात करते हैं आज के एक ऐसे इतिहास की जिसने मॉडर्न साइंस की दशा और दिशा दोनों बदल के रख दी. आज ही के दिन साल 1998 में सर्च इंजन 'GOOGLE' की शुरुआत की गई थी. मजे की बात ये हैं इसका नाम 'GOOGLE' भी एक गलती की वजह से पड़ा. दरअसल इसे पहले
BackRub के नाम से जाना जाता था लेकिन बाद में इसका नाम बदलकर GOOGOL रखा जाना था लेकिन एक स्पेलिंग की गलती की वजह से 'GOOGLE' को यह नाम मिला. 'GOOGLE के संस्थापक स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के दो पीएचडी के स्कॉलर सर्गेई ब्रिन और लैरी पेज (Sergey Brin and Larry Page) थें. बता दें कंपनी की शुरुआत से 7 सालों तक 4 सितंबर को ही गूगल के फाउंडेशन डे (Google's Foundation Day) के रूप में मनाया गया लेकिन बाद में गूगल ने अपना फाउंडेशन डे 27 सितंबर को घोषित कर दिया.

आज ही के दिन टाइटेनिक के मलबे की तस्वीर आई थी सामने
आज का दिन विश्व इतिहास की एक और बड़ी और दुखद घटना की गवाह है. आज ही के दिन साल 1985 में पूरे 73 सालों के बाद टाइटेनिक की डूबने के बाद की पहली तस्वीर सामने आयी है. टाइटेनिक (Titanic) दुनिया का सबसे बड़ा वाष्प आधारित यात्री जहाज था. जिसने 10 अप्रैल 1912 को
इंग्लैंड के साउथहैंप्टन से अपनी यात्रा शुरू की लेकिन मंजिल तक कभी नहीं पंहुचा. 14 अप्रैल 1912 में एक हिमशिला के टकराने से ये जहाज डूब गया था. इस दुर्घटना में करीब 1500 लोग मारे गए थे.

कोयना बांध आया था भूकंप की चपेट में
आज का दिन भारतीय इतिहास में भी एक दुखद घटना के लिए याद किया जाता है आज ही के दिन साल 1967 को महाराष्ट्र का कोयना बांध (Koyna Dam) भूकंप की चपेट में आकर ध्वस्त हो गया था जिसमे 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी.


देश-दुनिया में 4 सितंबर का इतिहास
2005: लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शन करते नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला गिरफ्तार हो गए.

2006: आस्ट्रेलिया के मशहूर टीवी पर्सनैलिटी और पर्यावरणविद स्टीव इरविन का एक समुद्री मछली के काटने से निधन हो गया.

1825: भारत के जाने-माने राजनीतिज्ञ दादा भाई नौरोजी का जन्म हुआ.

1952: भारत के मशहूर अभिनेता ऋषि कपूर का जन्म हुआ.</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/160/history-4-september-google-was-started-on-this-day-famous-actor-rishi-kapoor-was-born-know-more-important-events</guid><pubDate>04-Sep-2025 6:11:41 am</pubDate></item><item><title>Tea Recipe : दूध पहले डालें या पानी उबलने के बाद? सही तरीका जान लीजिए..चाय का स्वाद और खुशबू पड़ोसियों तक जाएगी</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/159/tea-recipe-add-milk-first-or-after-boiling-water-know-the-right-way-the-taste-and-aroma-of-the-tea-will-reach-the-neighbours</link><description>How to make perfect milk tea: दूध वाली चाय का असली स्वाद तभी आता है जब इसे सही तरीके से बनाया जाए. एक्सपर्ट्स के मुताबिक दूध हमेशा पानी में मसाले अच्छे से उबलने के बाद ही डालना चाहिए. इससे चाय का कलर, खुशबू और फ्लेवर लाजवाब हो जाता है. सही तरीके से बनी चाय न सिर्फ एनर्जी देती है बल्कि सर्दी-जुकाम जैसी परेशानी में भी राहत पहुंचाती है.


Perfect chai banane ka tarika: आजकल चाय सिर्फ एक ड्रिंक नहीं बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफ का सबसे इम्पॉर्टेन्ट हिस्सा बन चुकी है. खासकर दूध वाली चाय तो ऐसे लोगों के लिए सुबह की एनर्जी का डोज है जिनका दिन बिना चाय शुरू ही नहीं होता. सुबह उठते ही अगर चाय का कप हाथ में न हो तो कई लोगों का मूड खराब हो जाता है, सिर दर्द शुरू हो जाता है और दिनभर चिड़चिड़ापन बना रहता है. यही वजह है कि चाय बनाने का तरीका हर किसी के लिए बेहद मायने रखता है. लेकिन बड़ा सवाल यही है कि दूध पहले डालना चाहिए या पानी उबालने के बाद? बहुत से लोग कंफ्यूज रहते हैं और ज्यादातर लोग सही तरीका नहीं जानते. दरअसल चाय का टेस्ट और खुशबू दोनों ही इस बात पर डिपेंड करते हैं कि आप उसे किस तरीके से बनाते हैं. अगर तरीका सही हो तो आपकी चाय का फ्लेवर इतना शानदार होगा कि पड़ोसियों तक उसकी खुशबू पहुंच जाएगी और सब पूछेंगे कि चाय कहां से बनवाई.

दूध वाली चाय बनाने का तरीका
दूध वाली चाय का सही बेस
चाय बनाने के लिए सबसे जरूरी है सही बेस तैयार करना. इसके लिए सबसे पहले एक पैन में थोड़ा सा पानी डालकर उबाल लें. पानी में हल्की-सी मसाले वाली चीजें डाल सकते हैं जैसे काली मिर्च का पाउडर, हरी इलायची, दालचीनी, तेजपत्ता और चीनी. इन सबको अच्छे से पानी में उबालने से फ्लेवर गहराई तक निकल आता है और चाय का टेस्ट डबल हो जाता है.

दूध कब डालें?
अब आती है सबसे इम्पॉर्टेन्ट बात दूध कब डालें? एक्सपर्ट्स कहते हैं कि दूध को पानी उबलने के बाद ही डालना चाहिए. अगर आप सीधे दूध डालकर चाय उबालेंगे तो मसालों का असली स्वाद उसमें ठीक से नहीं आएगा. जब पानी में सारे फ्लेवर अच्छे से घुल जाएं, तब उसमें दूध मिलाएं और थोड़ी देर धीमी आंच पर उबालें. इससे चाय का कलर परफेक्ट आएगा, स्वाद लाजवाब होगा और खुशबू भी बेहद स्ट्रॉन्ग होगी.

चाय को ढककर रखना क्यों जरूरी?
जब चाय बन जाए तो तुरंत गैस बंद करके उसे छानने से पहले एक-दो मिनट किसी ढक्कन से ढककर रख दें. ऐसा करने से चाय का फ्लेवर और भी रिच हो जाता है और ऊपर उठने वाली भाप पूरे कप में अच्छी तरह से समा जाती है. यह छोटा-सा स्टेप आपकी चाय को और भी स्पेशल बना देगा.

चाय के फायदे
दूध वाली चाय सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद है. इसमें मौजूद कैफीन आपको दिनभर की एनर्जी देता है और थकान दूर करता है. ठंडी हवा या सर्दी-जुकाम के समय दूध की कड़क चाय गले की खराश को भी आराम पहुंचाती है. अदरक, इलायची और दालचीनी वाली चाय तो इम्युनिटी बढ़ाने के लिए भी बेस्ट मानी जाती है.

लोग क्यों पसंद करते हैं दूध वाली चाय
दूध वाली चाय का असली मजा इसी में है कि यह लोगों को जोड़ती है. आपने भी देखा होगा कि लोग अक्सर चलो चाय पर मिलते हैं कहकर बातें शेयर करते हैं. दोस्तों के साथ गपशप से लेकर ऑफिस ब्रेक तक, हर जगह चाय ही कनेक्शन का सबसे बड़ा जरिया है. यही वजह है कि दूध वाली चाय को सिर्फ ड्रिंक नहीं बल्कि एक इमोशन कहा जाता है.


परफेक्ट चाय बनाने के टिप्स

हमेशा ताजा दूध और साफ पानी का इस्तेमाल करें.
मसाले जैसे इलायची, दालचीनी और अदरक को हल्का क्रश करके डालें ताकि उनका स्वाद और खुशबू ज्यादा आए.
चीनी अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से डालें, हेल्दी ऑप्शन के लिए शुगर की जगह गुड़ भी ट्राई कर सकते हैं.
ज्यादा देर तक चाय को उबालें नहीं, वरना इसका स्वाद कड़वा हो सकता है.


तो अब आपको समझ आ गया होगा कि चाय का स्वाद असल में इस बात पर डिपेंड करता है कि आप दूध कब डालते हैं. सही तरीका यही है कि पहले पानी में मसाले डालकर अच्छे से उबालें और उसके बाद दूध मिलाएं. थोड़ी देर ढककर रखने से चाय का स्वाद और भी बढ़ जाएगा.</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/159/tea-recipe-add-milk-first-or-after-boiling-water-know-the-right-way-the-taste-and-aroma-of-the-tea-will-reach-the-neighbours</guid><pubDate>03-Sep-2025 2:20:42 pm</pubDate></item><item><title>History 3 September : आज ही के दिन गुम हो गया था CM वाईएसआर रेड्डी का हेलीकाप्टर..एक साथ आई भारत-पाकिस्तान बाढ़ में दो सौ से ज्यादा लोगों की मौत..जाने और प्रमुख घटनाएं</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/158/history-3-september-cm-ysr-reddy-s-helicopter-was-lost-on-this-day-more-than-two-hundred-people-died-in-the-india-pakistan-floods-that-occurred-simultaneously-know-more-important-incidents</link><description>On This Day in History 3 September: आज का इतिहास भारतीय और विश्व राजनीति में दो अहम (aaj ka itihas) घटनाओं की गवाह है. आज यानी 3 सितंबर 2009 को आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री येदुगुड़ी संदिंती राजशेखर रेड्डी यानी वाईएसआर रेड्डी (YSR Reddy's dead body found in the forest) का शव जंगल से बरामद हुआ था. वो दो सितम्बर का दिन था जब मुख्यमंत्री का हेलीकाप्टर नल्लामल्ला के जंगलों में गुम हो गया. 24 घंटों की पड़ताल, 5000 सैनिको के जवान और इसरो के सैटेलाइट ने इस हेलीकाप्टर को खोजने के दिन दिन- रात एक कर दिया था. बाद में वायुसेना के MI -8 ने दुर्घटनाग्रस्त हेलीकाप्टर के मलबे का पता लगाया.

आज का इतिहास विश्व राजनीति में भी एक अहम घटना को समेटे हुए है. आज यानी 3 सितम्बर 2006 को भारतीय मूल के भरत जगदेव (Bharat Jagdev) ने गुयाना के राष्ट्रपति (President of Guyana) पद शपथ ली थी. बता दें भारत जगदेव 1997 से 1999 और 2020 से वर्तमान समय के उपराष्ट्रपति पद पर बने हुए हैं. जगदेव महज 13 साल की उम्र में ही गुयाना की पीपुल्स प्रोग्रेसिव पार्टी की यूथ विंग से जुड़ गए थे और 16 की उम्र तक उसके नेता बन गए थें.

3 सितंबर का दिन द्वितीय विश्वयुद्ध (second World War) के दौरान एक अहम घटना का गवाह है. आज ही दिन साल 1943 में मित्र राष्ट्रों ने इटली पर हमला (the allies invaded italy) किया था.

देश-दुनिया में 3 सितंबर का इतिहास

1767 : कर्नल स्मिथ की सेना ने चंगमा की लड़ाई में निजाम और हैदर अली की संयुक्त सेना को हराया.

1833 : अमेरिका में बेंजामिन एचडे ने पहला अखबार न्यूयार्क सन शुरू किया.

1971 : कतर स्वतंत्र राष्ट्र बना.

1984 : दक्षिण फिलीपीन में भयानक तूफान में तकरीबन 1300 लोगों की मौत, सैकड़ों घायल.

1998 : नेल्सन मंडेला ने गुट निरपेक्ष आंदोलन शिखर सम्मेलन में कश्मीर का मुद्दा उठाया, प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कड़ी आपत्ति जताई. 

2003 : पाकिस्तान सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो पर देशद्रोह का मुकदमा चलाने का फैसला किया.

2007 : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री ख़ालिदा जिया और उनके पुत्र अराफ़ात रहमान भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ़्तार.

2007 : चीन के झिंगजियांग प्रान्त में चीनी और जर्मन विशेषज्ञों ने लगभग 16 करोड़ साल पुराने एक जीव के 17 दांत खोजने का दावा किया.

2008 : राजेन्द्र कुमार पचौरी संयुक्त राष्ट्र की संस्था जलवायु परिवर्तन के अन्तर सरकारी पैनल (आईपीसीसी) के दोबारा प्रमुख चुने गए.

2014: भारत और पाकिस्तान में एक साथ आई बाढ़ में दो सौ से ज्यादा लोगों की मौत.

2020: भारत और रूस ने अत्याधुनिक एके-203 रायफल भारत में बनाने के लिये एक बड़े समझौते को अंतिम रूप दिया.</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/158/history-3-september-cm-ysr-reddy-s-helicopter-was-lost-on-this-day-more-than-two-hundred-people-died-in-the-india-pakistan-floods-that-occurred-simultaneously-know-more-important-incidents</guid><pubDate>03-Sep-2025 6:17:36 am</pubDate></item><item><title>Recipe : घंटों में नहीं मिनटों में बनकर तैयार होगा मूंग दाल हलवा..मिलेगा हलवाई जैसा स्वाद..नोट कर लें रेसिपी</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/157/recipe-moong-dal-halwa-will-be-ready-in-minutes-not-hours-you-will-get-the-taste-of-a-confectioner-note-down-the-recipe</link><description>लाइफस्टाइल डेस्क ; अगर आप मूंग दाल का हलवा बनाने के लिए यह ट्रिक आज़माएंगे तो इसे बनाने में घंटों नहीं लगेंगे। तो चलिए जानते हैं कैसे झटपट बनाएं मूंग दाल का हलवा

मूंग दाल का हलवा नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है। यह एक ऐसी भारतीय मिठाई है जिसे अक्सर खास मौकों पर बनाया जाता है। लेकिन इसे बनाने का तरीका इतना लंबा और थका देने वाला होता है कि लोग इसे बनाने से कतराते हैं। घंटों तक दाल भिगोना, फिर उसे पीसना और फिर उसे धीमी आंच पर लगातार भूनते रहना। यह सब सोचकर ही हिम्मत जवाब दे जाती है। लेकिन अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। हम आपके लिए लेकर आए हैं एक ऐसी जादुई रेसिपी जिससे आप मिनटों में बिल्कुल वैसा ही दानेदार और स्वादिष्ट मूंग दाल हलवा बना सकते हैं। चलिए, जानते हैं इस खास रेसिपी के बारे में

मूंग दाल हलवा के लिए सामग्री:
मूंग दाल 1 कप, देसी घी आधा कप, चीनी आधा कप, दूध: आधा कप, इलायची पाउडर आधा चम्मच, बारीक कटे हुए मेवे (बादाम, पिस्ता), केसर के धागे 4-5

मूंग दाल हलवा बनाने की विधि:
पहला स्टेप: मूंग दाल को अच्छी तरह धोकर किसी कपड़े पर फैलाकर सुखा लें ताकि उसका सारा पानी निकल जाए। अब एक नॉन-स्टिक पैन में दाल को धीमी आंच पर हल्का सुनहरा होने तक भूनें। भुनी हुई दाल को ठंडा करके मिक्सी में दरदरा पीस लें। इसे बिल्कुल पाउडर जैसा न बनाएं, थोड़ा दानेदार रखें।

दूसरा स्टेप: एक कड़ाही में घी गरम करें। अब इसमें पीसी हुई मूंग दाल डालकर धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए भूनें। इसे तब तक भूनें जब तक इसमें से अच्छी खुशबू न आने लगे और इसका रंग सुनहरा न हो जाए। इसमें 5-7 मिनट लग सकते हैं।

तीसरा स्टेप: एक दूसरे बर्तन में दूध को हल्का गरम कर लें। भुनी हुई दाल में गरम दूध और चीनी डालकर अच्छी तरह मिलाएं। ध्यान रखें कि गांठें न पड़ें। अब इसे लगातार चलाते हुए तब तक पकाएं जब तक यह गाढ़ा न हो जाए और कड़ाही के किनारे छोड़ने लगे। इलायची पाउडर और केसर के धागे डालकर अच्छी तरह मिला लें। कटे हुए मेवे डालकर गार्निश करें।

आपका गर्मा-गर्म और स्वादिष्ट मूंग दाल हलवा परोसने के लिए तैयार है। यह विधि पारंपरिक तरीके की तुलना में बहुत कम समय लेती है और स्वाद में कोई समझौता नहीं होता।</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/157/recipe-moong-dal-halwa-will-be-ready-in-minutes-not-hours-you-will-get-the-taste-of-a-confectioner-note-down-the-recipe</guid><pubDate>02-Sep-2025 1:08:48 pm</pubDate></item><item><title>History of 02 September : आज ही के दिन शुरू हुआ था कभी न बंद होने वाला बैंक..हैदराबाद में पुल गिरने से 125 लोगों की हुई थी मौत.</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/156/history-of-02-september-on-this-day-the-bank-that-never-closes-was-started-125-people-died-due-to-the-collapse-of-the-bridge-in-hyderabad-</link><description>On This Day in History 2 September: 2 सितंबर (2 september ka itihas) वो तारीख जिसने भारतीय और विश्व इतिहास में कई अहम बदलाव अपने पन्नो में दर्ज किए हैं. ये वहीं दिन था जब साल 1945 में 6 साल से चले आ रहे नरसंहार का खात्मा हुआ था. 14 अगस्त 1945 में जापान के आत्मसमर्पण के बाद 2 सितंबर 1945 को विनाशकारी द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति (end of world war ii) हुई थी. कहा जाता है कि इस नरसंहार में करीब 7 से 8 करोड़ लोग मारे गए थे करोड़ों लोग बेघर हुए और न ही कितनों ने अपना सब कुछ खो दिया. इस भीषण युद्ध ने आर्थिक व्यवस्था की जड़ें हिला कर रख दी.

इतिहास में अब थोड़ा आगे बढ़ते है. और पहुंचते है साल 1969 में. 2 सितंबर वह तारीख है जिसने दुनिया के बैंकिंग क्षेत्र क्रांति ला दी. आज ही के दिन 1969 को एटीएम पहली बार दुनिया के सामने पेश किया गया था. Automated Teller Machine (ATM) को पहली बार संयुक्त राष्ट्र अमेरिका की वित्तीय राजधानी न्यूयॉर्क (Who invented ATM) में आम जनता के लिए पेश किया गया था. एटीएम मशीन की स्थापना सबसे पहले केमिकल बैंक (Chemical Bank) ने न्यूयॉर्क में की थी. बैंक ने इस मशीन को लॉन्च करने से पहले इसका विज्ञापन दिया था, 'हमारा बैंक 2 सितंबर को सुबह 9:00 बजे से खुलेगा और कभी बंद नहीं होगा'.

आज का इतिहास भारतीय परिदृश्यों में भी अहम भूमिका रखता है. आज ही के दिन यानी 2 सितम्बर साल 1999 में 'जल पारी' के नाम से विख्यात बुला चौधरी (bula chaudhary) ने इंग्लिश चैनल (english channel) को दूसरी बार तैर कर पार किया था. बता दें बुला चौधरी को इस अद्भुत कारनामे के लिए अर्जुन पुरूस्कार से सम्मानित किया था. इसी के साथ साल 2003 में उन्हें ध्यानचंद लाइफटाइम एचीवमेंट से भी नवाजा गया. बता दें बुला ने पांचों महाद्वीपों के सातों सागर को तैरकर पार किया था.

देश दुनिया में 2 सितंबर का इतिहास
1573 : अकबर ने अहमदाबाद के निकट एक निर्णायक युद्ध में विजय हासिल की और गुजरात पर कब्जा कर लिया। इस जीत की खुशी में बुलंद दरवाजा बनवाया गया.


1775 : पहले अमेरिकी युद्ध पोत हाना का जनरल जॉर्ज वाशिंगटन ने जलावतरण किया.

1789 : अमेरिका में राजस्व विभाग बनाया गया। एलेक्सजेंडर हेमिल्टन पहले मंत्री बने.

1806 : भूस्खलन के कारण स्विटजरलैंड का एक पूरा शहर बर्बाद, 457 लोगों की मौत.

1926 : इटली और यमन में एक समझौता, जिससे लाल सागर तट पर इटली का वर्चस्व.

1930 : यूरोप से अमेरिका के लिए पहली सीधी उड़ान भरी गई.

1946 : जवाहर लाल नेहरू के उप सभापतित्व में अंतरिम भारत सरकार का गठन.

1956 : हैदराबाद से सौ किलोमीटर दूर जडचेराला और महबूब नगर के बीच एक पुल गिरने से 125 लोगों की मौत.

1962 : सोवियत संघ क्यूबा को हथियार देने को राजी हुआ.

1990 : काला सागर में सोवियत यात्री जहाज के डूबने से 79 यात्रियों की मौत.

1992 : अमेरिका और रूस अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण के लिए संयुक्त उपक्रम बनाने पर सहमत हुए.

1996 : मुस्लिम विद्रोहियों और फिलिपीन सरकार ने 26 वर्ष के गृह युद्ध के बाद एक समझौते पर हस्ताक्षर किए.

1998 : पायलटरहित प्रशिक्षण विमान निशांत ने सफलतापूर्वक उड़ान भरी.

2001 : 1967 में विश्व में पहला हृदय प्रत्यारोपण करने वाले दक्षिण अफ़्रीका के अग्रणी हृदय विशेषज्ञ क्रिश्चियन बर्नार्ड का निधन.</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/156/history-of-02-september-on-this-day-the-bank-that-never-closes-was-started-125-people-died-due-to-the-collapse-of-the-bridge-in-hyderabad-</guid><pubDate>02-Sep-2025 6:19:41 am</pubDate></item><item><title>Recipe : उज्जैन का फेमस पोहा बनाने की रेसिपी..मुंह में जाते ही घुल जाएगा इतना बनता है मुलायम..जाने पूरी जानकारी</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/155/recipe-ujjain-s-famous-poha-recipe-it-will-melt-in-your-mouth-it-is-so-soft-know-full-details</link><description>लाइफस्टाइल डेस्क ; नाश्ते में पोहा खाना लोगों को खूब पसंद होता है। पोहा मध्यप्रदेश की फेमस डिश है। महाकाल की नगरी उज्जैन में तो पोहा जलेबी का नाश्ता पूरे दिन आपको खाने को मिल जाएगा। उज्जैन के पोहा का स्वाद ही अलग होता है। ये बहुत ही सॉफ्ट होता है और तेल नाम मात्र के लिए भी नहीं होता। पोहा का हल्का खट्टा मीठा स्वाद इसे और भी मजेदार बना देता है। अगर आप घर पर उज्जैन जैसा पोहा बनाना चाहते हैं तो इस रेसिपी से एक बार पोहा जरूर बनाकर खाएं। आपको वही स्वाद मिलेगा जो उज्जैन के पोहा में आता है।

उज्जैन के पोहा की रेसिपी

पहला स्टेप- आपको इसके लिए पतला वाला पोहा लेना है। सबसे पहले पोहा को पानी में भिगो दें। पोहा जितना अच्छी तरह पानी में फूलेगा उतना ही मिलायम भी बनेगा। अब पोहा का थोड़ा पानी निकाल दें और उसे साइड में रख दें।

दूसरा स्टेप- पोहा के लिए 1 प्याज काट लें। 2 थोड़ी मोटी वाली हरी मिर्च को मोटा काट लें। करी पत्ता, धनिया पत्ता ले लें। राई, सौंफ और खड़ा धनिया लें। अब एक कड़ाही या पैन में 1 चम्मच तेल डालें।

तीसरा स्टेप- तेल में सरसों, सौंफ और खड़ा धनिया डालें। ऊपर से करी पत्ता, हरी मिर्च, नमक और थोड़ी हल्दी डाल दें। अब इन्हें थोड़ा फ्राई करें। पोहा फूल गया होगा तो उसमें आधा चम्मच नमक और आधा चम्मच चीनी डाल दें।

चौथा स्टेप- अब फूले हुए पोहा को इस मसाले में मिला दें और सारी चीजों को अच्छी तरह से मिक्स कर लें। पोहा को थोड़ी देर के लिए किसी प्लेट से कवर कर दें। ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया, नींबू का रस, भुनी मूंगफली और सेव डालकर सर्व करें।

पांचवा स्टेप- स्ट्रीट वाले लोग पोहा को मसाले में मिलाने के बाद एक गर्म पानी के भगोने के ऊपर किसी प्लेट पर रखते हैं। इससे पोहा भाप से गर्म रहता है और उसमें नमी भी बनी रहती है। इस पोहा को ऊपर से कच्चा प्याज, धनिया और सेव डालकर दिया जाता है।</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/155/recipe-ujjain-s-famous-poha-recipe-it-will-melt-in-your-mouth-it-is-so-soft-know-full-details</guid><pubDate>01-Sep-2025 1:41:38 pm</pubDate></item><item><title>History of 01 September : जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी, आज ही के दिन हुई थी भारतीय जीवन बीमा निगम की स्थापना</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/154/history-of-01-september-with-life-even-after-life-life-insurance-corporation-of-india-was-established-on-this-day</link><description>नई दिल्ली। जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी की असरदार टैगलाइन के साथ देश के लाखों लोगों को बीमा की सेवाएं देने वाले भारतीय जीवन बीमा निगम की स्थापना आजादी के नौ साल बाद एक सितंबर के दिन ही की गई थी। यह दिन एक और कारण से भी इतिहास में दर्ज है।

आज भले शब्दकोश के नाम पर ढेरों ऑनलाइन सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन एक समय पढ़ने लिखने वाले लोगों के लिए शब्दकोश या डिक्शनरी के नाम पर मोटी-मोटी किताबे हुआ करती थीं और शब्दकोश को तैयार करना बहुत मुश्किल काम माना जाता था। भारत में शब्दकोश का जिक्र आते ही फादर कामिल बुल्के का नाम जहन में आता है। बुल्के का जन्म भी एक सितंबर को ही हुआ था।

देश दुनिया के इतिहास में एक सितंबर की तारीख पर दर्ज कुछ अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है:-

1858 : ईस्ट इंडिया कंपनी के निदेशकों की अंतिम बैठक लंदन के ईस्ट इंडिया हाउस में आयोजित की गई।

1878 : एम्मा एम नट्ट अमेरिका में पहली महिला टेलीफोन ऑपरेटर बनी।

1909 : प्रसिद्ध साहित्यकार और शब्दकोश तैयार करने वाले फ़ादर कामिल बुल्के का जन्म।

1923 : ग्रेट कैंटो भूकंप ने जापान के तोक्यो और योकोहामा शहरों में भारी तबाही मचायी।

1942 : रास बिहारी बोस ने इंडियन नेशनल आर्मी की स्थापना की।

1947 : भारतीय मानक समय की शुरूआत की गई।

1956 : भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की स्थापना।

1964 : इंडियन ऑयल रिफ़ाइनरी और इंडियन ऑयल कम्पनी को विलय करके इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन बनाई गयी।

1965 : पाकिस्तानी फौज ने कश्मीर में संघर्षविराम रेखा को पार किया।

2000 : चीन ने तिब्बत होते हुए नेपाल जाने वाले अपने एकमात्र रास्ते को बंद किया।

2018 : जकार्ता एशियाई खेलों में मुक्केबाज अमित पंघाल ने 49 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। वह एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले ओवरऑल आठवें भारतीय मुक्केबाज बने।

2018 : प्रणब बर्धन और शिबनाथ सरकार ने जकार्ता एशियाई खेलों की पुरुषों की ब्रिज प्रतियोगिता की युगल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता।

2020 : भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का दिल्ली में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। कई दिन तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद 31 अगस्त की शाम उनका निधन हो गया था।</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/154/history-of-01-september-with-life-even-after-life-life-insurance-corporation-of-india-was-established-on-this-day</guid><pubDate>01-Sep-2025 7:03:24 am</pubDate></item><item><title>Recipe : कैसे बनाएं दही वाले मसालेदार आलू.! पसंद है तीखा खाना तो कम तेल वाली इस रेसिपी को जरूर करें ट्राई</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/153/recipe-how-to-make-spicy-potatoes-with-curd-if-you-like-spicy-food-then-definitely-try-this-recipe-with-less-oil</link><description>लाइफस्टाइल डेस्क : क्या आपको भी तीखा-मसालेदार खाना पसंद है? अगर हां, तो आपको एक बार इस रेसिपी को फॉलो कर दही वाले आलू को जरूर बनाकर देखना चाहिए।

क्या आपने कभी दही वाले आलू बनाए हैं? अगर नहीं, तो यकीन मानिए आपको इस डिश का टेस्ट काफी ज्यादा पसंद आने वाला है। दही वाले आलू बनाने के लिए आपको 4 मीडियम साइज्ड बॉइल्ड और कटे हुए आलू, एक कप दही या फिर मट्ठा, 2 बारीक कटी हुई हरी मिर्च, एक छोटी स्पून कद्दूकस की हुई अदरक, हाफ स्पून हल्दी पाउडर, हाफ स्पून लाल मिर्च पाउडर, एक स्पून धनिया पाउडर, नमक, बारीक कटा हुआ हरा धनिया और एक छोटा स्पून तेल चाहिए होगा।


पहला स्टेप- सबसे पहले एक पैन में एक छोटी स्पून तेल डालकर गर्म कर लीजिए। अब आपको इसी पैन में हरी मिर्च और अदरक को थोड़ा सा भून लेना है।

दूसरा स्टेप- इसके बाद पैन में बॉइल्ड आलू एड कर इन्हें भी हल्का सा भून लीजिए। अब आप इस मिक्सचर में दही को भी मिला सकते हैं।

तीसरा स्टेप- अब पैन में हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और नमक को एड कर अच्छी तरह से मिला लीजिए।

चौथा स्टेप- आपको पैन को लगभग 5 मिनट के लिए ढक देना है और फिर सब्जी को धीमी आंच पर पकने देना है।

पांचवां स्टेप- आखिर में आप इस सब्जी के टेस्ट को बढ़ाने के लिए बारीक कटे हुए हरे धनिए का इस्तेमाल कर सकते हैं।

फिलहाल, आप गर्मागर्म दही वाले आलू को रोटी-पराठे के साथ सर्व कर सकते हैं। अगर आप इस रेसिपी को फॉलो कर दही वाले आलू बनाते हैं, तो बच्चों से लेकर बड़ों तक, सभी को इस सब्जी का स्वाद काफी ज्यादा अच्छा लगेगा। अगली बार आपका जब भी आलू की सब्जी खाने का मन हो, तो आप दही वाले आलू की इस रेसिपी को ट्राई करके देख सकते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक-दो स्पून तेल में बनने वाली ये सब्जी आपकी सेहत के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकती है।</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/153/recipe-how-to-make-spicy-potatoes-with-curd-if-you-like-spicy-food-then-definitely-try-this-recipe-with-less-oil</guid><pubDate>31-Aug-2025 1:32:59 pm</pubDate></item><item><title>31 Agust Ka Etihas : आज के दिन जवागल श्रीनाथ -पूर्व भारतीय़ क्रिकेटर का जन्म..भारत के 13वें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का निधन..जाने और प्रमुख घटनाएं</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/152/history-of-31-august-on-this-day-javagal-srinath-former-indian-cricketer-was-born-india-s-13th-president-pranab-mukherjee-passed-away-know-other-important-events</link><description>इतिहास के पन्नों में 31 अगस्त : क्रिकेट में पहली बार दिग्गज खिलाड़ी सर गैरी सोबर्स ने जड़े एक ओवर में 6 छक्के
क्रिकेट इतिहास में कुछ ही ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने एक ओवर में छह छक्के लगाए हैं। उन्हीं खिलाड़ियों में एक हैं वेस्टइंडीज के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी सर गैरी सोबर्स, जिन्होंने क्रिकेट के इतिहास में पहली बार एक ओवर में छह छक्के जड़े थे। उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में यह कारनामा किया था। दिग्गज खिलाड़ी ने आज ही के दिन यानी 31 अगस्त 1968 को इंग्लिश काउंटी चैंपियनशिप में नॉटिंघमशायर की ओर से खेलते हुए ग्लेमोर्गन के खिलाफ मैच में एक ओवर में 6 छक्के लगाए थे। उस दिन सोबर्स ने यह छक्के ग्लैमरगन के गेंदबाज मैल्कम नैश के ओवर में जड़े थे। उनके इस रिकॉर्ड को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वहीं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका के हर्शल गिब्स ने नीदरलैंड्स के खिलाफ 2007 वनडे वर्ल्ड कप में एक ओवर में छह छक्के मारे थे। इन खिलाड़ियों के अलावा इस लिस्ट में युवराज सिंह, कीरोन पोलार्ड समेत अन्य कई बल्लेबाजों ने नाम शामिल हैं।

अन्य अहम घटनाएंः

1881 - अमेरिका में पहली बार टेनिस चैंपियनशिप खेला गया।1920 - अमेरिकी शहर डेट्रॉइट में रेडियो पर पहली बार समाचार प्रसारित किया गया।1956 - भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने राज्य पुनर्गठन विधेयक को मंजूरी दी।1962 - कैरेबियाई देश टोबैगो एवं त्रिनिदाद ब्रिटेन से स्वतंत्र हुए।1991 - उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान ने सोवियत संघ से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की।1997 - ब्रिटेन की राजकुमारी और राजकुमार चार्ल्स की पूर्व पत्नी डायना की पेरिस में कार दुर्घटना में मृत्यु।2005 - ईराक की राजधानी बगदाद में धार्मिक अवसर पर फिदायीन हमले के भय से मची भगदड़ में 816 लोग मारे गये।2008- सरकार ने अमरनाथ भूमि विवाद सुलझाया।2009- जनता दल (यूनाइटेड) की राष्ट्रीय परिषद के नई दिल्ली में आयोजिय सम्मेलन में शरद यादव को पुनः सार्वसम्मति से पार्टी का अध्यक्ष चुन लिया गया।2016 - ब्राजील की राष्ट्रपति दिल्मा रुसेफ को पद से हटा दिया गया।

जन्म

1919 - अमृता प्रीतम, प्रसिद्ध कवयित्री, उपन्यासकार और निबंधकार।1962 - पल्लम राजू, एक प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ।1963 - ऋतुपर्णो घोष - प्रसिद्ध बंगाली फिल्मनिर्माता, लेखक और अभिनेता।1940 - शिवाजी सावंत - मराठी भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार।1984 - भारतीय फिल्म अभिनेता राजकुमार राव1969 - जवागल श्रीनाथ -पूर्व भारतीय़ क्रिकेटर।

निधन

1995 - बेअंत सिंह - पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री।2002 - फरहाद मेहराद लोकप्रिय ईरानी गायक, गीतकार।2016 - कश्मीरी लाल ज़ाकिर- पद्मश्री से सम्मानित प्रख्यात उर्दू कवि, उपन्यासकार।2020 - प्रणब मुखर्जी - भारत के 13वें राष्ट्रपति, जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेता रहे थे।</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/152/history-of-31-august-on-this-day-javagal-srinath-former-indian-cricketer-was-born-india-s-13th-president-pranab-mukherjee-passed-away-know-other-important-events</guid><pubDate>31-Aug-2025 6:05:10 am</pubDate></item><item><title>Recipe : भूल जाएंगे पनीर की सब्जी का स्वाद, जब चखेंगे ये पहाड़ी चौंसा दाल.! जानें स्वाद और सेहत से भरपूर ये रेसिपी कैसे बनाएं?</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/151/recipe-you-will-forget-the-taste-of-paneer-ki-sabzi-when-you-taste-this-pahadi-chaunsa-dal-know-how-to-make-this-recipe-full-of-taste-and-health-</link><description>Lifestyle Desk : गढ़वाल में लोग चौंसा दाल बेहद चाव से खाते हैं। इसका स्वाद भी बेहद लाजवाब लगता है। चलिए, जानते हैं इस दाल की रेसिपी कैसे बनाएं?

रोज-रोज एक जैसा दाल खाकर अक्सर बोरियत होने लगती हैं। ऐसे में आज हम आपके लिए पहाड़ी दाल की रेसिपी लेकर आए हैं। उत्तराखंड में लोग चौंसा दाल खूब चवा से बनाते हैं। यह दाल स्वाद के साथ टेस्टी भी बहुत लगती है। चलिए जानते हैं कैसे बनाएं ये पहाड़ी चौसा दाल?

पहाड़ी चौसा दाल बनाने की आवश्यक सामग्री
चौंसा दाल - 1 कप, प्याज - 1, लहसुन 6-7 कली, अदरक 1 इंच, टमाटर 1, घी - 2-3 बड़े चम्मच, जीरा - 1 चम्मच, हल्दी पाउडर - आधा चम्मच, धनिया पाउडर - 1 चम्मच, लाल मिर्च पाउडर - आधा चम्मच, गरम मसाला - आधा चम्मच, नमक - स्वादानुसार, पानी - 2-3 कप, हरी धनिया कटी हुई


पहाड़ी चौसा दाल बनाने की विधि:
पहला स्टेप: सबसे पहले रात भर 1 कप भीगी हुई चौंसा दाल को अच्छी तरह धोकर साफ कर लें। अगले दिन एक प्रेशर कुकर में भीगी हुई दाल, थोड़ा नमक और 2 कप पानी डालकर 4-5 सीटी आने तक या दाल के नरम होने तक पकाएं। दाल को बहुत ज़्यादा गलाने की ज़रूरत नहीं है, इसे थोड़ा खड़ा रखना ही सही होता है।

दूसरा स्टेप: अब, एक पैन में घी गरम करें। जब घी गरम हो जाए तो उसमें जीरा डालें। जीरा चटकने के बाद बारीक कटा हुआ लहसुन और अदरक डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें।अब कटा हुआ प्याज डालकर सुनहरा होने तक भूनें। इसके बाद कटा हुआ टमाटर डालकर नरम होने तक पकाएं। हल्दी, धनिया और लाल मिर्च पाउडर डालकर अच्छे से मिलाएं और कुछ देर तक भूनें।

तीसरा स्टेप: अब इस मसाले में उबली हुई दाल और उसका पानी भी मिला दें। अगर दाल बहुत गाढ़ी लग रही हो तो थोड़ा गरम पानी मिला सकते हैं। दाल को धीमी आंच पर पकाएं ताकि मसाले दाल में अच्छे से मिल जाएं। आखिर में गरम मसाला और कटी हुई हरी धनिया डालकर मिलाएं। गरमा गरम चौसा दाल को चावल के साथ परोसें।</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/151/recipe-you-will-forget-the-taste-of-paneer-ki-sabzi-when-you-taste-this-pahadi-chaunsa-dal-know-how-to-make-this-recipe-full-of-taste-and-health-</guid><pubDate>30-Aug-2025 3:05:13 pm</pubDate></item><item><title>Aaj Ka Itihas 30 August : आज ही के दिन मनाया जाता है लघु उद्योग दिवस..गीतकार शैलेन्द्र का जन्म..जाने और प्रमुख घटनाएं</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/150/today-s-history-30-august-small-industry-day-is-celebrated-on-this-day-lyricist-shailendra-was-born-know-other-important-events</link><description>Aaj Ka Itihas 30 August 2025 : आज का इतिहास में आज हम जानेंगे 30 अगस्त से जुडी घटनाओं के बारे में। बता दें कि इतिहास के पन्नों में 30 अगस्त के दिन भारत और विश्व में घटी ऐसी बहुत सी महत्वपूर्ण घटनायों का जिक्र है जिनके बारे में जानना बेहद दिलचस्प है। कई बार आपने भी इतिहास के विषय में बहुत सी ऐसी ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में पढ़ा और सुना होगा जिसका संबंध 30 अगस्त के इतिहास से संबधित रहा होगा।


तो आइए कुछ इतिहास के पन्नों को पलट कर जानने की कोशिश करते हैं कि आज के दिन 30 अगस्त को देश और दुनिया में कौन -कौन सी मुख्य घटनाएं घटी थीं।
अक्सर हम सुनते हैं कि हमारा इतिहास बहुत पुराना हैं, लेकिन हमें हमारे देश और दुनिया के इतिहास की पूरी जानकारी नहीं इसलिए हम यहाँ हमारा एक छोटा सा प्रयास कर रहे हैं जो आपको पूरे देश और दुनिया की इतिहास की और आज के इतिहास की जानकारी मिल सके जिससे आपका ज्ञान और बढ़ सके।

तो आइए जानते हैं कि 30 अगस्त को देश और दुनिया के इतिहास में आज के दिन कौन -कौन सी खास घटनाएं हुईं थी

30 अगस्त की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ ( Important events of August 30 )

1659 - दारा शिकोह को औरंगजेब द्वारा दी गयी थी फाँसी ।
1682 - विलियम पेन इंग्लैंड से रवाना होने के बाद में अमेरिका में पेनसिल्वेनिया कॉलोनी की थी स्थापना ।
1780 - जनरल बेनेडिक्ट अर्नोल्ड ने वेस्ट प्वाइंट फोर्ट में ब्रिटिश सेना के सामने आत्मसमर्पण करने का किया था वादा ।
1806 - न्यूयॉर्क शहर का दूसरा दैनिक समाचार पत्र डेली एडवर्टाइजर आखिरी बार किया गया था प्रकाशित ।
1928 - द इंडिपेंडेंस ऑफ़ इंडिया लीग की भारत में हुई थी स्थापना।
1947- भारतीय संविधान का प्रारूप तैयार करने के लिए डॉ भीमराव आम्बेडकर के नेतृत्व में एक समिति का किया गया था गठन ।
1951 - फिलीपींस और अमेरिका ने एक रक्षा संधि पर किये थे हस्ताक्षर ।
1984 - अंतरिक्ष यान डिस्कवरी ने पहली बार भरी थी उड़ान ।
1991 - अजरबैजान ने सोवियत संघ से अपनी स्वतंत्रता की थी घोषणा ।
1999 - पूर्वी तिमोर के निवासियों ने इंडोनेशिया से आजादी के लिए किया था भारी मतदान ।
2002 - ताइवान में भूकम्प के झटके किये गए थे महसूस ।
2002 - कोनोको इंक और फिलिप्स पेट्रोलियम ने विलय कर बनायी थी कोनोकोफिलिप्स ।
2003- रूसी पनडुब्बी बेरेंट्स सागर में डूबी, नौ मरे, आस्ट्रेलिया ने विश्व नौकायन में जीता था स्वर्ण पदक ।

30 अगस्त को जन्मे व्यक्ति (Famous Birthdays 30 August)

2001 - भारत की महिला मुक्केबाज़ जैस्मिन लंबोरिया का जन्म हुआ।
1954 - वकील और राजनीतिज्ञ रवि शंकर प्रसाद का जन्म हुआ।
1923 - शैलेन्द्र गीतकार का जन्म हुआ।
1918 - ओडिशा के 9वें मुख्यमंत्री रहे बिनायक आचार्य का जन्म हुआ।
1912 - दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान प्रसिद्ध महिला लड़ाकों में से एक नैंसी वेक का जन्म हुआ।
1903 - भगवतीचरण वर्मा, हिन्दी जगत् के प्रमुख साहित्यकार का जन्म हुआ।
1900 - भारतीय चिकित्सक बीर भान भाटिया का जन्म हुआ।
1895 - भारतीय राजनीतिज्ञ और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सरदार हुकम सिंह का जन्म हुआ।
1888 - भारत की आज़ादी के लिए फाँसी के फंदे पर झूलने वाले अमर शहीदों में से एक कनाईलाल दत्त का जन्म हुआ।
1559 - अकबर का पुत्र एवं मुग़ल वंश का शासक जहाँगीर (सलीम) का जन्म हुआ।

30 अगस्त को हुए निधन ( Famous Deaths 30 August)

2014 - प्रसिद्ध इतिहासकार बिपिन चन्द्र का निधन हुआ।
2008- प्रख्यात उद्योगपति कृष्ण कुमार बिड़ला का निधन हुआ।
1659 - मुग़ल बादशाह शाहजहाँ और मुमताज़ महल का सबसे बड़ा पुत्र दारा शिकोह का निधन हुआ।
1952 - - भारतीय रिज़र्व बैंक के पहले गवर्नर ओसबोर्न स्मिथ का निधन हुआ।
1976 - हिन्दी साहित्यकार जी.पी. श्रीवास्तव का निधन हुआ।

30 अगस्त के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव ( Important events and festivities of 30 August)

लघु उद्योग दिवस</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/150/today-s-history-30-august-small-industry-day-is-celebrated-on-this-day-lyricist-shailendra-was-born-know-other-important-events</guid><pubDate>30-Aug-2025 6:02:21 am</pubDate></item><item><title>Kadhi Recipe : कढ़ी बार-बार फटती है? ये आसान तरीका अपनाएं और घर पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसी परफेक्ट कढ़ी</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/149/kadhi-recipe-kadhi-splits-again-and-again-follow-this-easy-method-and-make-perfect-restaurant-like-kadhi-at-home</link><description>Perfect Kadhi Recipe: भारतीय व्यंजनों में कढ़ी का नाम एक लोकप्रिय और पारंपरिक डिश के रूप में लिया जाता है. चावल के साथ कढ़ी खाने का अपना ही स्वाद और मज़ा है. लेकिन अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि उनकी कढ़ी अच्छी नहीं बनती या दही फट जाता है और स्वाद बिगड़ जाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कढ़ी बनाने की सही विधि और कुछ ज़रूरी बातों का ध्यान नहीं रखा जाता.

कढ़ी एक ऐसी डिश है जिसमें बैलेंस्ड फ्लेवर, स्मूद टेक्सचर और परफेक्ट कंसिस्टेंसी बहुत मायने रखती है. कढ़ी बनाने में सबसे बड़ी समस्या तब आती है जब दही फट जाता है. यह ज़्यादातर इसलिए होता है क्योंकि दही और बेसन का सही मिश्रण नहीं बनता या दही को तेज़ आंच पर सीधे गर्म कर दिया जाता है. कढ़ी बनाने की प्रक्रिया को समझना इसलिए बेहद ज़रूरी है.

दही और बेसन का सही घोल तैयार करना
सबसे पहले दही और बेसन को अच्छे से मिलाना चाहिए. एक बाउल में दही लें और उसमें बेसन डालकर अच्छी तरह फेंटें, ताकि उसमें कोई गांठ न रहे. इसमें स्वादानुसार हल्दी और लाल मिर्च पाउडर डाल सकते हैं. इसके बाद धीरे-धीरे पानी मिलाकर स्मूद और पतला घोल तैयार करें. ध्यान रखें कि घोल एकदम चिकना होना चाहिए, तभी कढ़ी का स्वाद अच्छा आएगा.

कढ़ी में नमक डालने का सही समय
ज़्यादातर लोग दही और बेसन के घोल में ही नमक डाल देते हैं, जिसकी वजह से उबालते समय दही फटने लगता है. सही तरीका यह है कि नमक तब डालें जब कढ़ी अच्छी तरह से उबलकर गाढ़ी हो जाए और लगभग तैयार हो जाए. नमक हमेशा आखिर में या बीच में डालें. शुरुआत में डालने से कढ़ी का टेक्सचर बिगड़ सकता है.

धीमी आंच पर पकाना
कढ़ी को तेज़ आंच पर पकाने से दही के फटने का डर बढ़ जाता है. इसे हमेशा मध्यम या धीमी आंच पर पकाना चाहिए और बीच-बीच में हिलाते रहना चाहिए. लगातार हिलाने से कढ़ी नीचे से लगती नहीं है और उसका स्वाद और टेक्सचर दोनों अच्छे रहते हैं.</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/149/kadhi-recipe-kadhi-splits-again-and-again-follow-this-easy-method-and-make-perfect-restaurant-like-kadhi-at-home</guid><pubDate>29-Aug-2025 1:57:02 pm</pubDate></item><item><title>History of 29 Agust : आज के दिन अमेरिकी पॉप सिंगर माइकल जैक्सन का जन्म..भारतीय हॉकी प्लेयर मेजर ध्यानचंद का जन्म..जाने और प्रमुख घटनाएं</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/148/history-of-29-august-on-this-day-american-pop-singer-michael-jackson-was-born-indian-hockey-player-major-dhyanchand-was-born-know-other-important</link><description>आज का इतिहास : 29 अगस्त 1965। इस दिन को कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी के इतिहास में यादगार दिन माना जाता है। दरअसल इस दिन एक एस्ट्रोनॉट ने एक्वानॉट से बात की थी। यानी अंतरिक्ष की ऊंचाई से समुद्र की गहराई में पहली बार बात की गई।

21 अगस्त 1965 को अमेरिका ने जेमिनी-5 स्पेसक्राफ्ट लॉन्च किया था। इसमें गॉर्डन कूपर और पीट कॉनरेड अंतरिक्ष में गए थे। दोनों ने 8 दिन अंतरिक्ष में बिताए जो उस समय अंतरिक्ष में सबसे ज्यादा देर तक रहने का रिकॉर्ड था। दरअसल किसी भी स्पेसक्राफ्ट को धरती से चांद तक जाने और वापस आने में करीब 8 दिन का समय लगता है। नासा टेस्ट करना चाहता था कि नई बनाई बैटरी स्पेसक्राफ्ट को 8 दिन तक इलेक्ट्रिसिटी सप्लाय कर पाती है या नहीं।

एक तरफ ये दोनों अंतरिक्ष में रिकॉर्ड बना रहे थे, दूसरी तरफ कूपर के ही एक दोस्त स्कॉट कारपेंटर अमेरिका के एक समुद्री मिशन का हिस्सा थे। स्कॉट समुद्र की गहराई मापने से पहले एक अंतरिक्षयात्री थे और कूपर के साथ नासा के एक मिशन का हिस्सा रहे थे। इसलिए दोनों एक-दूसरे को पहले से जानते थे। अंतरिक्ष की यात्रा करने के बाद स्कॉट ने फैसला लिया कि वो समुद्र की गहराइयों को भी मापेंगे। 1965 में स्कॉट अमेरिकी नेवी के सीलैब-II मिशन का हिस्सा बन गए। इस मिशन का उद्देश्य डीप सी डाइविंग और समुद्र की गहराइयों में इंसानों पर हो रहे फिजियोलॉजिकल और साइकोलॉजिकल प्रभावों का अध्ययन करना था।

सीलैब- II की लॉन्च से पहले स्कॉट कारपेंटर (आगे वाली पंक्ति में बाएं से दूसरे)
28 अगस्त को एक कैप्सूलनुमा ट्यूब के जरिए स्कॉट और उनकी टीम के लोग समुद्र में उतारे गए। 29 अगस्त 1965 को उन्होंने समुद्री सतह से 205 फीट की गहराई से अंतरिक्ष में अपने दोस्त कूपर से रेडियोटेलीफोन के जरिए बातचीत की। इतनी लंबी दूरी की ये पहली कॉल थी।

अगले ही दिन गॉर्डन कूपर और चार्ल्स पीट अंतरिक्ष से लौटे। उनका पैराशूट प्रशांत महासागर में लैंड हुआ, इसी महासागर में 205 फीट नीचे स्कॉट अपने मिशन पर थे।

स्कॉट 30 दिन तक समुद्र में रहे। उस समय सबसे ज्यादा दिनों तक समुद्र में रहने का ये भी एक रिकॉर्ड था।

1831: माइकल फैराडे ने इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन की खोज की

साल 1819 में हैंड्स ओसर्टेड ने ये बताया था कि इलेक्ट्रिक करंट से मैग्नेटिक फील्ड बनाई जा सकती है। जब इस बारे में फैराडे को पता चला तो उन्होंने सोचा कि अगर इलेक्ट्रिक करंट से मैग्नेटिक फील्ड बनाई जा सकती है, तो मैग्नेटिक फील्ड से भी इलेक्ट्रिक करंट फ्लो हो सकता है।

फैराडे अपने इस आइडिया पर काम करने लगे। 29 अगस्त 1831 को उन्होंने एक मोटी लोहे की रिंग पर 2 इंसुलेटेड वायर की क्वाइल को लपेट दिया। एक क्वाइल को बैटरी से और दूसरी को गेल्वेनोमीटर से जोड़ा गया। जब बैटरी से इलेक्ट्रिसिटी फ्लो की गई तो पास वाली क्वाइल के गेल्वेनोमीटर में हलचल होने लगी। जब सर्किट बंद किया गया तो गेल्वेनोमीटर की सुई उल्टी दिशा में हलचल करने लगी।

ये पेंटिंग 27 दिसंबर 1855 के दिन की है, जब फैराडे रॉयल इंस्टीट्यूशन में व्याख्यान दे रहे थे।
फैराडे ने इस एक्सपेरिमेंट के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड में बदलाव होने से इलेक्ट्रोमोटिव फोर्स सर्किट में इलेक्ट्रिसिटी पैदा करता है। इसे ही इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन कहा जाता है और इसी की मैथेमेटिकल इक्वेशन को फैराडे के नियम के नाम से जाना जाता है।

फैराडे की ये खोज इलेक्ट्रिसिटी के क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण थी। फैराडे की थ्योरी पर ही वर्तमान के इलेक्ट्रिक मोटर और डायनेमो काम करते हैं।

29 अगस्त के दिन को इतिहास में और किन-किन महत्वपूर्ण घटनाओं की वजह से याद किया जाता है...

1997: अमेरिकन आन्त्रप्रेन्योर रीड हेस्टिंग्स और मार्क रेंडोल्फ ने स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म नेटफ्लिकस की स्थापना की।

1958: अमेरिकी पॉप सिंगर माइकल जैक्सन का जन्म हुआ।

1949: सोवियत संघ ने अपने पहले परमाणु बम का परीक्षण किया।

1947: बाबासाहेब अंबेडकर संविधान की ड्रॉफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष नियुक्त किए गए।

1905: भारतीय हॉकी के स्टार प्लेयर मेजर ध्यानचंद का इलाहाबाद में जन्म हुआ।

1612: सूरत की लड़ाई में अंग्रेजों के हाथ पुर्तगालियों को हार का सामना करना पड़ा।</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/148/history-of-29-august-on-this-day-american-pop-singer-michael-jackson-was-born-indian-hockey-player-major-dhyanchand-was-born-know-other-important</guid><pubDate>29-Aug-2025 6:37:34 am</pubDate></item><item><title>Recipe : नाश्ते में एक बार गांव देहात स्टाइल में पोहा बनाकर खाएं, जीभ पर चढ़ जाएगा ये स्वाद</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/147/recipe-make-and-eat-poha-in-village-style-once-for-breakfast-its-taste-will-enthrall-your-tongue</link><description>Recipe : गांव वाली पोहा की रेसिपी- पोहा सुपर हेल्दी नाश्ता है। अगर आप इसे कुछ सब्जियां डालकर पकाते हैं तो इसके गुण और भी बढ़ जाते हैं। मध्यप्रदेश का पोहा बहुत फेमस है, लेकिन अब पोहा ज्यादातर सभी के घरों में बनता है। पोहा बनाने की अलग-अलग कई रेसिपी हैं। आज हम आपको एकदम गांव देहात स्टाइल वाला पोहा बनाने का तरीका बता रहे हैं। इसमें आपको देसी स्वाद मिलेगा। अगर आप पोहा का वही एक जैसा स्वाद खाकर बोर हो गए हैं तो एक बार ये रेसिपी जरूर ट्राई करें। ये पोहा काफी मजेदार बनता है और एकदम मुलायम रहता है।

गांव देहात स्टाइल पोहा की रेसिपी
पहला स्टेप- इस पोहा को बनाने के लिए आपको 4-5 लहसुन की कली लेनी हैं उन्हें छील लें। अब 1 हरी मिर्च, एक छोटा अदरक का टुकड़ा, एक छोटा प्याज कटा हुआ और जीरा लेकर सारी चीजों को अच्छी तरह से कूट लें। इसमें कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर, नमक और कटा हुआ हरा धनिया डालकर एक बार सारी चीजों को फिर से कूटते हुए मिक्स कर लें। पोहा का मसाला बनकर तैयार है।

दूसरा स्टेप- अब कड़ाही में तेल डालें। उसमें राई और मूंगफली डालकर भून लें। 7-8 करी पत्ता डाल दें और तैयार किया हुआ मसाला तेल में डाल दें। मसाले को पकाने के बाद इसमें एक कटा हुआ टमाटर और एक उबला हुआ आलू काटकर मिला दें।

तीसरा स्टेप- पोहा को अच्छी तरह पहले पानी से 1-2 बार भिगोकर धो लें। अब सारा पानी निकाल दें और पोहा को फूलने के लिए 5 मिनट के लिए छोड़ दें। 5-7 मिनट में पोहा एकदम फूल जाएगा और सॉफ्ट भी होगा। अगर पोहा थोड़ा कड़ा हो तो इसमें ऊपर से पानी के छींटे लगा दें। 2 मिनट के बाद भीगा हुआ पोहा मसालें में डालकर मिला दें।

चौथा स्टेप- आखिर में पोहा में आधे नींबू का रस और बारीक कटा हुआ हरा धनिया मिला दें। ढ़ककर धीमी आंच पर पोहा को 2 मिनट के लिए पका लें। तैयार है एकदम गांव देहात स्टाइल में पोहे का नाश्ता। आप इस रेसिपी से एक बार पोहा जरूर ट्राई करें।</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/147/recipe-make-and-eat-poha-in-village-style-once-for-breakfast-its-taste-will-enthrall-your-tongue</guid><pubDate>28-Aug-2025 2:25:26 pm</pubDate></item><item><title>History 28 August : आज ही के दिन अमेरिका को मिला था पहला अश्वेत राष्ट्रपति प्रत्याशी..जाने और प्रमुख घटनाएं</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/146/history-28-august-on-this-day-america-got-its-first-black-presidential-candidate-know-other-important-events</link><description>On This Day in History 28 August: 28 अगस्त का इतिहास (28 august ka itihaas) अमेरिकी राजनीती में एक बेहद अहम दिन है. आज ही के दिन साल 2008 में अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी (Democratic Party) ने बराक ओबामा (Barack Obama) को अपना राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया था. ये अमेरिकी इतिहास में पहला मौका था जब किसी अश्वेत नागरिक को राष्ट्र की सत्ता संभालने की कमान सौंपी गई थी. बता दें बराक ओबामा संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के 44वें और पहले अश्वेत अमेरिकी राष्ट्रपति (black american president) बने थे.


28 अगस्त का इतिहास भारतीय सरजमीं पर मुगलों के शासन (Mughal rule) की कड़ी में भी अहम है. आज ही के दिन साल 1600 में मुगलों ने अहमदनगर पर कब्जा (Capture of Ahmednagar) कर लिया था.


आज का दिन इतिहास की एक और घटना लगभग हम सबके जहन में हैं. जब 28 अगस्त 2011 को दिल्ली के प्रसिद्ध रामलीला मैदान (Ramlila Maidan) में जन 'लोकपाल बिल' की लड़ाई लड़ रहे अन्ना हजारे ने 12 दिनों के बाद अपना अनशन तोड़ा था. बता दें 74 वर्षीय अन्ना हजारे ने लोकपाल (Lokpal bill) के मुद्दे पर सरकार की नींद उड़ा दी थी, जिसके बाद संसद ने संसद की भावना के तहत अन्ना हजारे (Anna Hazare) की तीन मुख्य मांगों को लोकपाल विधेयक पर बनी स्थाई समिति को भेजने का फैसला किया था. सरकार के इसी फैसले बाद अन्ना ने अपना अनशन तोड़ा था. ये वही लड़ाई थी, जिसने आंदोलन के खात्मे और लोगों को सत्ता में उतरने के रास्ते दिखाएं. जिससे आगे चलकर आम आदमी पार्टी का जन्म हुआ.

देश दुनिया में 28 अगस्त का इतिहास
1521: तुर्की के सुल्तान सुलेमान प्रथम के सैनिकों ने बेलग्रेड पर कब्जा किया.

1845: प्रसिद्ध पत्रिका साइंटेफिक अमरीकन का पहला संस्करण छपा.

1896: आज ही के दिन भारत के एक जाने माने शायर,लेखक और आलोचक रघुपति सहाय उर्फ फिराक गोरखपुरी का जन्म हुआ था.

1916: जर्मनी ने रोमानिया के विरूद्ध युद्ध की घोषणा कर दी.1966: प्रिया दत्त का जन्म हुआ था.</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/146/history-28-august-on-this-day-america-got-its-first-black-presidential-candidate-know-other-important-events</guid><pubDate>28-Aug-2025 5:49:45 am</pubDate></item><item><title>Sabudana Kofta Recipe : साबूदाना खिचड़ी ही नहीं कोफ्ता भी होता है बेहद टेस्टी, नोट कर लें रेसिपी</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/145/sabudana-kofta-recipe-not-only-sabudana-khichdi-but-kofta-is-also-very-tasty-note-down-the-recipe</link><description>Sabudana Kofta Recipe : साबूदाना कोफ्तों को बनाने के लिए साबूदाना और आलू का उपयोग किया जाता है। ये कोफ्ते बाहर से हल्के क्रिस्पी और अंदर से सॉफ्ट होते हैं। तो आइए बिना देर किए जान लेते हैं कैसे बनाए जाते हैं टेस्टी साबूदाना कोफ्ते।

Sabudana Kofta Recipe : शाम के नाश्ते में कुछ चटपटा बनाकर करना हो तैयार या स्कूल लंच में बच्चों को देना हो कुछ हेल्दी, ज्यादातर महिलाएं साबूदाना खिचड़ी बनाना पसंद करती हैं। साबूदाना खिचड़ी स्वादिष्ट होने के साथ झटपट बनकर तैयार भी हो जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं व्रत से लेकर शाम के नाश्ते में पसंद किए जाने वाले साबूदाना से सिर्फ खिचड़ी ही नहीं बल्कि टेस्टी कोफ्ते भी बनाकर तैयार किए जा सकते हैं। साबूदाना कोफ्तों को बनाने के लिए साबूदाना और आलू का उपयोग किया जाता है। ये कोफ्ते बाहर से हल्के क्रिस्पी और अंदर से सॉफ्ट होते हैं। तो आइए बिना देर किए जान लेते हैं कैसे बनाए जाते हैं टेस्टी साबूदाना कोफ्ते।

साबूदाना कोफ्ता बनाने के लिए सामग्री
-1 कप साबूदाना

-2 मीडियम साइज उबले हुए आलू

-2 बड़े चम्मच भुनी और कुटी हुई मूंगफली

-1 बारीक कटी हुई हरी मिर्च

-नमक स्वादानुसार

-आधा छोटा चम्मच सेंधा नमक

-तलने के लिए तेल

-आधा कप दही

-आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर

-आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर

-आधा छोटा चम्मच सेंधा नमक

-1 बड़ा चम्मच घी

-एक चुटकी हींग

-1 कप पानी

-गार्निश करने के लिए धनिया पत्ती

साबूदाना कोफ्ता बनाने का तरीका
फिलहाल साबूदाना कोफ्ता बनाने के लिए सबसे पहले साबूदाना को रात भर पानी में भिगोकर रखें। जब साबूदाना फूलकर नरम हो जाए तो इसे छानकर अलग रख लें। अब साबूदाना में उबले हुए आलू, कटी हुई हरी मिर्च, मूंगफली और नमक डालकर अच्छी तरह मिलाते हुए मिश्रण से छोटे-छोटे गोले बनाकर तैयार कर लें। इसके बाद एक पैन में तेल गर्म करके उसमें साबूदाना के तैयार गोलों को क्रिस्पी गोल्डन होने तक तलें। अब एक कड़ाही में घी गर्म करके उसमें हींग डालें। अब एक अलग बर्तन में दही लेकर उसमें हल्दी, लाल मिर्च और सेंधा नमक अच्छी तरह मिलाकर घी में डालकर मीडियम आंच पर पकाएं। इस बात का ख्याल रखें कि दही फट न जाए। कोफ्ते की ग्रेवी को पतला करने के लिए आप स्वाद अनुसार थोड़ा पानी डालकर उसे पतला भी कर सकते हैं। अब कड़ाही में पहले से तले हुए साबूदाना कोफ्तों को ग्रेवी में डालकर 5 मिनट और धीमी आंच पर पकाएं। जब आपको लगे कि कोफ्तों ने ग्रेवी का रस पी लिया है तो कोफ्ता करी को कटी हुई हरी धनिया से गार्निश करके गर्मा-गर्म रोटी या चावल के साथ परोसें।</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/145/sabudana-kofta-recipe-not-only-sabudana-khichdi-but-kofta-is-also-very-tasty-note-down-the-recipe</guid><pubDate>27-Aug-2025 2:32:58 pm</pubDate></item><item><title>History of 27 Agust : आज ही के दिन पहले जेट इंजन वाले विमान ने उड़ान भरी थी..उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में भड़का था दंगा</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/144/history-of-27-august-on-this-day-the-first-jet-engine-plane-took-off-riots-broke-out-in-muzaffarnagar-uttar-pradesh</link><description>History of 27 Agust : 27 अगस्त 1908 में ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स के कूटामुंड्रा में सर डोनाल्ड ब्रेडमैन का जन्म हुआ था, नवंबर 1928 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया
27 अगस्त का इतिहास एक बड़े अविष्कार का इतिहास है। आज ही के दिन दुनिया को पहला जेट एयरक्राफ्ट मिला था, हाइकल नाम के जर्मन वैज्ञानिक ने इसे तैयार किया था। उन्हीं के नाम से इस पहले जेट विमान का नाम भी हाइकल HE-178 रखा गया था। 27 अगस्त 1939 को इस विमान ने पहली उड़ान भरी।

हाइकल कभी किसी एयरफोर्स में शामिल नहीं हुआ, एक नवंबर 1939 में इसका प्रदर्शन हुआ था। इस दौरान एयरक्राफ्ट 598 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंचा। लेकिन, इस प्रदर्शन से जर्मनी के वायु सेना के अधिकारी खुश नहीं थे। इसके बाद जर्मनी की एविएशन मिनिस्ट्री ने इसे स्वीकार नहीं किया। जर्मन एविएशन मिनिस्ट्री ने इस प्रोजेक्ट के लिए फंड देने से मना कर दिया। इसके बाद भी हाइकल ने पहला टर्बो जेट इंजन बनाने की शुरुआत की।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भड़का था सामुदायिक दंगा, बुलानी पड़ गई थी सेना

देश में साम्प्रादायिक दंगों की एक बहुत बड़ी फेहरिस्त है। आज ही के दिन 2013 में उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर में दंगे शुरू हुए थे। जिले के कवाल गांव में कथित तौर पर जाट समुदाय की लड़की के साथ मुस्लिम युवक ने छेड़छाड़ की। उसके बाद लड़की के दो ममेरे भाइयों गौरव और सचिन ने उस युवक की हत्या कर दी। बदले में मुस्लिमों ने दोनों की जान ले ली।

इसके बाद ही दंगे भड़के। 27 अगस्त को शुरू हुई यह हिंसा 17 सितंबर तक चली। दंगे को काबू करने के लिए सेना बुलानी पड़ी। दंगे में 62 लोगों की जान गई, बड़े पैमाने पर निजी और सरकारी सम्पत्ति का नुकसान हुआ।

आज ही के दिन हुआ था सर डॉन ब्रेडमैन का जन्म

27 अगस्त 1908 में ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स के कूटामुंड्रा में सर डोनाल्ड ब्रेडमैन का जन्म हुआ था। नवंबर 1928 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया। उन्होंने अपने टेस्ट करियर में 6,996 रन बनाए। टेस्ट में उनका टॉप स्कोर 334 रन है। अपने करियर में उन्होंने कुल 29 सेंचुरी लगाई। भारत के खिलाफ सिर्फ पांच मैच में डॉन ने चार शतक लगाए। इनमें एक दोहरा शतक है। भारत के खिलाफ 178 के औसत से डॉन ने 715 रन बनाए हैं।

इतिहास के पन्नों में आज के दिन को इन घटनाओं की वजह से भी याद किया जाता है...

1604 में आज ही के दिन अमृतसर स्थित हरमंदिर साहिब में गुरु ग्रंथ साहिब की स्थापना की गई थी।
1859 में देश के महान उद्योगपति दोराबजी टाटा का जन्म हुआ था। उन्होंने ही टाटा स्टील की नींव रखी थी।
150 साल पहले 1870 में भारत के पहले मजदूर संगठन के रूप में श्रमजीवी संघ की स्थापना हुई।
1985 में नाइजीरिया में मेजर जनरल मोहम्मद बुहारी की सरकार का तख्ता पलट हो गया था। उनकी जगह जनरल इब्राहिम बाबनगिदा नए शासक बने थे।
आज ही के दिन 1972 में भारतीय प्रोफेशनल रेसलर दलीप सिंह राणा यानी द ग्रेट खली का जन्म हुआ।
1976 में सेना की प्रथम महिला मेजर जनरल जी. अली राम मिलिट्री नर्सिंग सेवा की निदेशक बनीं। इसी दिन गायक मुकेश का निधन हुआ था।
27 अगस्त 1999 को सोनाली बनर्जी भारत की पहली महिला मरीन इंजीनियर बनी थीं। जिस समय सोनाली मरीन इंजीनियर बनी थीं, तब उनकी उम्र मात्र 22 साल थी।</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/144/history-of-27-august-on-this-day-the-first-jet-engine-plane-took-off-riots-broke-out-in-muzaffarnagar-uttar-pradesh</guid><pubDate>27-Aug-2025 5:59:46 am</pubDate></item><item><title>Recipe : कैसे बनाएं लहसुन की चटाकेदार चटनी, पसंद है तीखा खाना, तो जरूर ट्राई करके देखें</title><link>https://kalamkiawaz.com/importantnews/143/recipe-how-to-make-spicy-garlic-chutney-if-you-like-spicy-food-then-definitely-try-it</link><description>लाइफस्टाइल डेस्क : क्या आपको भी तीखा खाने का शौक है? अगर हां, तो आपको लहसुन की चटनी की इस रेसिपी को कम से कम एक बार जरूर ट्राई करके देखना चाहिए।

अगर खाने के साथ चटनी सर्व की जाए, तो खाने का स्वाद कई गुना बढ़ सकता है। अगर आपको भी तीखा, मिर्ची या फिर मसाले वाला खाना पसंद है, तो आप लहसुन की चटनी बनाकर देख सकते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लहसुन की चटनी बनाने के लिए आपको 80 ग्राम लहसुन, 80 ग्राम सूखा नारियल, 30 ग्राम मूंगफली और 12-14 लाल मिर्च की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा आपको एक बड़ी स्पून जीरा, 2 बड़ी स्पून सफेद तिल, नमक, एक स्पून काली मिर्च पाउडर और एक देगी मिर्च भी निकाल लेनी है।

पहला स्टेप- लहसुन की चटनी बनाने के लिए आपको सबसे पहले एक पैन में मूंगफली, सूखे नारियल, सफेद तिल और जीरे को एड कर रोस्ट कर लेना है।

दूसरा स्टेप- अब आपको इस पैन में सूखी लाल मिर्च, लहसुन और नमक डालना है और फिर इन चीजों को लगभग एक से दो मिनट तक भून लेना है।

तीसरा स्टेप- आपको इस मिक्सचर को ठंडा होने के लिए छोड़ देना है। अब आपको इन सभी चीजों को मिक्सी में डालना है।

चौथा स्टेप- मिक्सी में काली मिर्च पाउडर और देगी मिर्च भी एड करें और फिर इन सभी चीजों को दरदरा करके पीस लें।

आपकी लहसुन की तीखी चटनी सर्व करने के लिए तैयार है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आप इस चटनी को किसी भी एयरटाइट कंटेनर में स्टोर करके रख सकते हैं। लहसुन की इस चटाकेदार चटनी को वड़ा पाव, डोसा, पराठा या फिर दाल-चावल के साथ सर्व किया जा सकता है। यकीन मानिए इस चटनी का टेस्ट आपको भी काफी ज्यादा पसंद आएगा। आप इस चटनी को महज 10 मिनट में तैयार कर सकते हैं। इस चटनी को रोटी के साथ भी खाया जा सकता है। ये तीखी चटनी आपके खाने के स्वाद को कई गुना बढ़ा सकती है।</description><guid>https://kalamkiawaz.com/importantnews/143/recipe-how-to-make-spicy-garlic-chutney-if-you-like-spicy-food-then-definitely-try-it</guid><pubDate>26-Aug-2025 2:02:47 pm</pubDate></item></channel></rss>